Farmers Protest : राकेश टिकैत ने गाजीपुर धरनास्थल पर लगाई बच्चों की पाठशाला, ककहरा के साथ पढ़ाया देशप्रेम

राकेश टिकैत ने गाजीपुर धरनास्थल पर लगाई बच्चों की पाठशाला, ककहरा के साथ पढ़ाया देशप्रेम

Tricity Today | राकेश टिकैत ने गाजीपुर धरनास्थल पर लगाई बच्चों की पाठशाला

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सोमवार की सुबह गाजीपुर में धरना स्थल पर आसपास रहने वाले मजदूर वर्ग के बच्चों के लिए पाठशाला लगाई। राकेश टिकैत केंद्र सरकार को एमएसपी और तीन कानूनों का पाठ तो पढ़ा ही रहे हैं, आज सोमवार को उन्होंने गाजीपुर बॉर्डर पर आर्थिक रूप से कमज़ोर बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित किया। राकेश टिकैत ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। बच्चों को हिंदी अंग्रेजी वर्णमाला के साथ देश प्रेम का पाठ पढ़ाया। बच्चों से कहा कि बड़े होकर अफसर बनें और किसान-मजदूर की बात सबसे पहले सुनें।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ धरना प्रदर्शन चलते हुए 3 महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है। ऐसे में राकेश टिकैत एक तरह से रोजमर्रा की सामान्य जिंदगी धरना स्थल पर ही बता रहे हैं। वह सुबह-शाम मीडिया और मुलाकात करने आने वाले नेताओं से घिरे रहते हैं। बीच में जब खाली वक्त मिलता है तो कुछ दूसरी गतिविधियों में लग जाते हैं। मसलन, अब उन्होंने गाजीपुर बॉर्डर पर पाठशाला लगानी शुरू कर दी है। सोमवार को खुद राकेश टिकैत ने बच्चों को पढ़ाया। इस पूरे इलाके में मजदूर और गरीब वर्ग के बच्चे रहते हैं। इन्हें राकेश टिकैत और उनके साथी पढ़ा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा एक झुग्गी बनाई गई है। जिसमें एक बोर्ड लगाया गया है। किताबें, पेंसिल, सलेट और चौक का इस्तेमाल करके बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। सोमवार की सुबह राकेश टिकैत ने बच्चों को पढ़ाया। हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती, पहाड़े आदि पढ़ाने के बाद बच्चों को देशभक्ति का पाठ भी पढ़ाया है। 

राकेश टिकैत ने कहा, "हम लोग यहां केवल राजनीति नहीं कर रहे हैं। आसपास रहने वाले लोगों की मदद कर रहे हैं। हम यहां रहने वाले लोगों को कष्ट होने देना नहीं चाहते हैं। हमारे साथी आसपास के परिवारों की मदद के लिए पानी भरकर पहुंचाते हैं। जरूरत पड़ने पर उनके लिए खाने-पीने का बंदोबस्त भी किया जाता है। बड़ी संख्या में आसपास रहने वाले लोगों को सर्दी के मौसम में कपड़े बांटे गए हैं। झुग्गी झोपड़ियों में अलाव का इंतजाम भी किसानों ने किया था।"

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