राजपूतों के इस गांव में नहीं मनाई जाती रक्षाबंधन, मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा है मामला

गाजियाबाद से बड़ी खबर : राजपूतों के इस गांव में नहीं मनाई जाती रक्षाबंधन, मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा है मामला

राजपूतों के इस गांव में नहीं मनाई जाती रक्षाबंधन, मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा है मामला

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राजपूतों के इस गांव में नहीं मनाई जाती रक्षाबंधन, मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा है मामला Uttar Pradesh/Ghaziabad News : आगामी 11 अगस्त को पूरे देश में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाएगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक ऐसा गांव है, जहां रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाया जाता है। यह गांव राजपूतों का है। इस गांव में करीब 20 हजार से भी अधिक लोग निवास करते हैं। यहां पर मोहम्मद गोरी के कार्यकाल से रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाया जाता है। इस गांव की बहू तो अपने भाई को राखी बांधती है, लेकिन इस गांव की बेटियां अपने भाइयों को राखी नहीं बांधती है।

इस गांव ने योद्धाओं और बाहुबलियों को जन्म दिया
इस गांव का नाम सुराना है। यह गांव 12वीं सदी में विकसित हुआ था। यहां पर राजपूतों और क्षत्रियों का आवास रहा था। सुराना गांव को पहले सोनगढ़ के नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि इस गांव ने बहुत से योद्धाओं और बाहुबलियों को जन्म दिया है। 

रक्षाबंधन के दिन हजारों लोगों को कुचलवा दिया था
गांव में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सैकड़ों साल पहले राजस्थान से आए पृथ्वीराज चौहान के वंशज सोनसिंह राणा ने यहां पर अपना डेरा जमाया था। जब इस बात का पता मोहम्मद गौरी को चला तो उसने सोनगढ़ में रक्षाबंधन के दिन हमला करवा दिया था। बुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि मोहम्मद गोरी ने रक्षाबंधन के दिन सोहनगढ़ पर हमला करके औरतों, बच्चों, बुजुर्ग और युवाओं को हाथियों के पैरों तले जिंदा कुचलवा दिया था।

अगर मनाई तो हुआ हादसा
गांव की प्रधान रेनू यादव ने बताया कि पुरानी परंपरा है कि हमारे गांव में रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है। छाबड़िया गौत्र की कुल आबादी करीब 8 हजार है, जो यह रक्षाबंधन नहीं मनाते है। इसके अलावा बाहर से बसी कुछ अन्य गौत्र उस त्यौहार को मना लेते हैं। हालां,कि गांव के कुछ लोग ऐसे हैं जिनके घर रक्षाबंधन के दिन बेटा या उनके घर में पल रही गाय को बछड़ा हुआ। इसके बाद उन्होंने फिर त्यौहार को मनाने का प्रयास किया, लेकिन घर में हुई दुर्घटना के चलते फिर कभी किसी ने रक्षाबंधन नहीं मनाया।

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