अखिलेश के ट्वीट पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, कहा- इनको पत्थरबाजों और आतंकियों में नजर आते हैं शांतिदूत

उत्तर प्रदेश : अखिलेश के ट्वीट पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, कहा- इनको पत्थरबाजों और आतंकियों में नजर आते हैं शांतिदूत

अखिलेश के ट्वीट पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, कहा- इनको पत्थरबाजों और आतंकियों में नजर आते हैं शांतिदूत

Google Image | Brajesh Pathak And Akhilesh

अखिलेश के ट्वीट पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, कहा- इनको पत्थरबाजों और आतंकियों में नजर आते हैं शांतिदूत Lucknow : सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ट्वीट पर तीखा पलटवार करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, "सपा और उसके नेताओं को इन पत्थरबाजों व आतंकियों में हमेशा से ही शांतिदूत नजर आते हैं। इसके अलावा वाराणसी, अयोध्या और लखनऊ में भी कुछ साल पहले जब इन्हीं आतंकियों ने बम ब्लास्ट कर कई बेगुनाहों की जान ली थी, तब उन कथित शांतिदूतों की पैरवी के लिए सपा हाईकोर्ट तक पहुंच गई थी।"

पत्थरबाजों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं : डिप्टी सीएम
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा, जिन लोगों ने अपने कार्यकाल में सिर्फ दंगा और दंगाइयों का समर्थन किया हो और आज यह लोग ही इंसाफ की बात कर रहे हैं। योगी सरकार में दंगाइयों के लिए कोई जगह नहीं है। इसके अलावा अब हमारी सरकार अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है। जिसके तहत ऐसे पत्थरबाजों को किसी भी हालत में बख्शेगी नहीं। इसी प्रकार की राजनीति के कारण लगभग कुछ वर्षों में पंचायत से लेकर देश की सबसे बड़ी पंचायत के चुनाव में सपा को मुंह की खानी पड़ी है।"

हम दंगाइयों व पत्थरबाजों को माफ नहीं करेंगे : ब्रजेश पाठक
ब्रजेश पाठक ने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब अखिलेश और उनकी पार्टी ने दंगाइयों व पत्थरबाजों की पैरवी की हो। जब-जब योगी सरकार का बुलडोजर इन अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर गरजता है तो अखिलेश इनके समर्थन में आ जाते हैं, अगर ये इनके समर्थन में नहीं उतरेंगे तो इनकी राजनीति कैसे चमकेगी।

अखिलेश यादव ने यह ट्वीट किया था
आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए कहा था, "ये कहां का इंसाफ है कि जिसकी वजह से देश में हालात बिगड़े और दुनिया भर में सख्त प्रतिक्रिया हुई, वो सुरक्षा के घेरे में हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बिना वैधानिक जांच पड़ताल बुलडोजर से सजा दी जा रही है।  इसकी अनुमति न हमारी संस्कृति देती है, न धर्म, न विधान, न संविधान।"

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