जेपी ग्रुप पर चला हाईकोर्ट का हथौड़ा, 100 करोड़ जमा करने का आदेश

Updated Feb 25, 2020 17:51:41 IST | Tricity Today Chief Correspondent

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण जेपी स्पोर्टस सिटी को दी गई 1,000 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था। कंपनी प्राधिकरण के इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट गई है। मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए जेपी ग्रुप को आदेश दिया कि 100 करोड रुपये जमा करें। अब इस मामले में अगली सुनवाई अप्रैल...

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प्रतीकात्मक फोटो

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण जेपी स्पोर्टस सिटी को दी गई 1,000 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था। कंपनी प्राधिकरण के इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट गई है। मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए जेपी ग्रुप को आदेश दिया कि 100 करोड रुपये जमा करें। अब इस मामले में अगली सुनवाई अप्रैल में की जाएगी।

यमुना अथॉरिटी ने जेपी ग्रुप को यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे स्पोर्टस सिटी बसाने के लिए 1,000 हेक्टेयर जमीन का आवंटन किया था। इस जमीन पर जेपी ग्रुप ने फार्मूला वन रेसिंग ट्रैक बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, क्रिकेट और फुटबॉल स्टेडियम बनाए गए हैं। जेपी समूह ने इस जमीन पर 10 आवासीय परियोजनाएं लॉन्च की थीं। इन आवासीय परियोजनाओं में 4,506 खरीदार हैं। जिनसे कंपनी ने 2,400 करोड़ रुपये में से 1,900 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं।

खरीदारों से इतना पैसा लेने के बावजूद उनको घर-भूखंड नहीं मिले हैं। इसके अलावा यमुना अथॉरिटी के 1,043.92 करोड़ रुपये बकाया हैं। खरीदारों को कब्जा नहीं देने और प्राधिकरण का पैसा बकाया होने के चलते यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने आवंटन रद्द कर दिया है। जेपी स्पोर्टस सिटी को आवंटित 1,000 हेक्टेयर जमीन के आवंटन को रद्द करने के लिए प्राधिकरण के बोर्ड ने 12 फरवरी को प्रस्ताव पारित किया था।

इसके बाद विकास प्राधिकरण के सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने आवंटन निरस्त किया था। जिसके खिलाफ कंपनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। जिसमें हाईकोर्ट ने जेपी ग्रुप को 100 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया है। अब अगली सुनवाई अप्रैल में होगी।

इस बारे में यमुना अथॉरिटी के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि कंपनी यमुना अथॉरिटी का बकाया भुगतान नहीं कर रही है। खरीदारों को कब्जा नहीं दे रही है। कंपनी को 20 से ज्यादा बार नोटिस भेजे गए थे। पैसा जमा करना तो दूर जवाब तक नहीं दिया गया था। लिहाजा, आवंटन रद्द किया है। हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।

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