BIG BREAKING: जेवर एयरपोर्ट में तीन और रनवे बनेंगे, जानिए क्यों श्रीलंका और सिंगापुर पर देश की निर्भरता खत्म होगी, करोड़ों डॉलर बचेंगे

BIG BREAKING: जेवर एयरपोर्ट में तीन और रनवे बनेंगे, जानिए क्यों श्रीलंका और सिंगापुर पर देश की निर्भरता खत्म होगी, करोड़ों डॉलर बचेंगे

BIG BREAKING: जेवर एयरपोर्ट में तीन और रनवे बनेंगे, जानिए क्यों श्रीलंका और सिंगापुर पर देश की निर्भरता खत्म होगी, करोड़ों डॉलर बचेंगे

Google Image | 3 more runways will be built at Jewar Airport

BIG BREAKING: जेवर एयरपोर्ट में तीन और रनवे बनेंगे, जानिए क्यों श्रीलंका और सिंगापुर पर देश की निर्भरता खत्म होगी, करोड़ों डॉलर बचेंगे
जेवर में अब पांच रनवे बनाए जाएंगे, एक रनवे बनाया जाएगा एमआरओ के लिएgangaएमआरओ का हब बनेगा, विमानों से जुड़ी कंपनियों के लिए तीन सेक्टर आरक्षित

जेवर में प्रस्तावित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी बड़ी खबर है। एयरपोर्ट बनाने के लिए ठेका हासिल करने वाली कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के बीच 7 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के कार्यालय में एग्रीमेंट होगा। इस एग्रीमेंट पर ज्यूरिक एजी के सीईओ और नायल के सीईओ दस्तखत करेंगे। ग्रेटर नोएडा की सीईओ ऋतु महेश्वरी और उत्तर प्रदेश नागरिक उड्डयन निदेशालय के निदेशक सुरेंद्र सिंह बतौर गवाह दस्तखत करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बुधवार की सुबह यह जानकारी दी है। एसपी गोयल ने ट्वीट करके बताया कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण करने के लिए ठेका हासिल करने वाली कंपनी के अधिकारी भारत आ रहे हैं। दोनों कंपनियों के बीच यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के कार्यालय में 7 अक्टूबर को एग्रीमेंट होगा। आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण विश्वव्यापी मंदी के चलते करीब 6 महीने से इस एग्रीमेंट पर दोनों पक्ष दस्तखत होने का इंतजार कर रहे हैं। यमुना प्राधिकरण दो बार तारीख आगे बढ़ा चुका है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर का निर्माण छह महीने में शुरू हो जाएगा। एयरपोर्ट की विकासकर्ता स्विस कंपनी से अनुबंध होने के बाद उसे 1334 हेक्टेयर जमीन सौंप दी जाएगी। 

मास्टर प्लान में सरकार की होगी अंतिम मुहर
नियाल के सीईओ डॉ. अरुणीवर सिंह ने बताया कि इस छह महीने में कंपनी को अपना मास्टर प्लान पास कराना होगा। मास्टर प्लान में यह दिखा जाएगा कि रनवे कहां पर होगा, हैंगर (जहां पर जहाज खड़े होंगे) कहां पर होंगे, पार्किंग और टर्मिनल बिल्डिंग कहां पर होगी। मास्टर प्लान को पहले नियाल बोर्ड पास करेगा। इसके बाद प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड इंप्लीमेंटेशन कमेटी पास करेगी। इसके बाद सरकार की ओर इसमें अंतिम मुहर लगेगी। इसके बाद काम शुरू होगा। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया छह महीने में पूरी हो जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। 2023 में यहां से उड़ान शुरू करने की तैयारी है। हालांकि कोरोना महामारी के चलते अनुबंध करने में देरी हो गई

ऋण देने के लिए बैंकों का कंर्सोटियम बना
स्विस कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी ने अनुबंध से पहले परियोजना के लिए फंड का इंतजाम शुरू कर दिया है। इसके बैंकों का एक कंर्सोटियम बनाया गया है। इसमें 70 प्रतिशत हिस्सेदारी एसबीआई की है। 30 प्रतिशत में अन्य बैंक शामिल हैं। बताया जाता है कि एसबीआई ने 5 हजार करोड़ रुपये का ऋण देने का फैसला कर लिया है। जैसे-जैसे प्रोजेक्ट बढ़ेगा, बैंक लोन देते रहेंगे।

जेवर एयरपोर्ट के लिए 5 हजार हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है। नियाल ने सलाहकार कंपनी पीडब्ल्यूसी से 3 और रनवे के लिए टीईएफआर बनवाने के लिए अप्रैल में कहा था। पीडब्ल्यूसी ने यह रिपोर्ट तैयार कर ली है। अभी जहां पर दो रनवे बनने हैं, उसके उत्तर की ओर एक और दक्षिण (खुर्जा-पलवल मार्ग) की ओर दो रनवे बनेंगे। इसके लिए 3400 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। नियाल अब यह रिपोर्ट शासन को भेजेगा। शासन से सहमति के बाद इस पर आगे बढ़ा जाएगा।

प्रस्तावित दो रनवे के उत्तर की ओर बनने वाला रनवे इसके साथ ही बनाया जाएगा। दरअसल यह रनवे एमआरओ के लिए आरक्षित होगा। इसमें वहीं विमान उतरेंगे, जिनका मेंटीनेंस होना होगा। जेवर एयरपोर्ट को एमआरओ हब बनाया जाएग। अभी तक देश के विमानों का रखरखाव अधिकतर दूसरे देशों में होता है। जिसकी वजह से सालाना करोड़ों डॉलर विदेशी मुद्रा श्रीलंका और सिंगापुर जैसे देशों में चली जाती है। एमआरओ हब जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बनेगा तो न केवल देश की विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि दूसरे देशों की एविएशन कंपनियां यहां अपने हवाई जहाज सुधरवाने लेकर आएंगी। जिससे भारतीय एविएशन इंडस्ट्री को उल्टा फायदा होगा।

यमुना प्राधिकरण ने एविएशन हब विकसित करने के लिए यहां तीन सेक्टरों को आरक्षित किया है। सेक्टर-7, 8 और 30 इसके लिए आरक्षित किए गए हैं। यहां पर एविएशन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को तरजीह दी जाएगी। विमानों में रखरखाव में अभी बोइंग व एयरबस सबसे आगे हैं। भारत के बाजार को देखते हुए ये कंपनियां भी यहां आ सकती हैं।

उत्तर प्रदेश एविएशन सेक्टर का हब बनने की ओर अग्रसर हैं। यहां पर चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड‘डे होंगे। इसमें कुछ चल रहे हैं तो कुछ बनने की ओर अग्रसर हैं। इसमें लखनऊ, वारणासी, कुशीनगर व जेवर शामिल हैं। इसके अलावा 25 घरेलू हवाई अड‘डे हैं। जबकि इस प्रदेश की कुल आबादी करीब 24 करोड़ है। यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और नायल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ अरुण वीर सिंह का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट में अब 5 रनवे बनाए जाएंगे। तीन और रनवे की रिपोर्ट तैयार हो गई है। जल्द ही इस रिपोर्ट को शासन को भेजा जाएगा। शासन की सहमति के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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