यमुना किनारे डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ खड़े हुए खादर वाले गांवों के लोग

Updated Feb 02, 2020 18:29:41 IST | Tricity Today Reaporter

यमुना डूब क्षेत्र के गांव दोस्तपुर मंगरौली की जमीन पर डंपिंग ग्राउंड और लैंडफिल साइट का निर्माण नोएडा विकास प्राधिकरण करना चाहता है। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। लेकिन इसके खिलाफ यहां के किसान विरोध

Photo Credit:  Tricity Today
यमुना किनारे डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ खड़े हुए खादर वाले गांवों के लोग

यमुना डूब क्षेत्र के गांव दोस्तपुर मंगरौली की जमीन पर डंपिंग ग्राउंड और लैंडफिल साइट का निर्माण नोएडा विकास प्राधिकरण करना चाहता है। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। लेकिन इसके खिलाफ यहां के किसान विरोध में लामबंद हो गए हैं। किसानों ने जमीन प्राधिकरण को देने से इंकार कर दिया है। रविवार को ग्रामीणों ने एक बैठक की। किसानों ने बैठक में स्पष्ट कर दिया कि कोई किसान प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन प्राधिकरण को नहीं देंगे। किसानों ने ऐलान किया है कि अपनी जमीन पर डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने देंगे।

नोएडा प्राधिकरण दोस्तपुर मंगरौली की जमीन पर स्थाई डंपिंग ग्राउंड बनाने जा रहा है। इससे दोस्तपुर, मंगरौली, छपरौली, सेक्टर-168 में बनी हाउसिंग सोसायटी और याकूतपुर गांव पर असर पड़ेगा। गांव के किसान चमन प्रधान ने बताया कि डंपिंग ग्राउंड को लेकर गांव के निवासियों ने रविवार को एक बैठक की है। सभी ने एक राय से यह कहा है कि किसी भी स्थिति में डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन नहीं देंगे और न यहां बनने देंगे। यहां डंपिंग ग्राउंड बनने का प्रश्न ही नहीं है। हम गांववासी पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे। यहां की जमीन किसानों की है।

उन्होंने कहा कि यहां डम्पिंग ग्राउंड बनने से वातावरण विषाक्त हो जाएगा तथा यहां भावी पीढ़ी को इसका प्रभाव भुगतना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि नोएडा प्राधिकरण यमुना पुस्ता के अंदर की जमीन पर खसरा नम्बर-133, 134, 136 से 170 तक कुल 12.59 हेक्टेयर यानि 31.11 एकड़ भूमि पर डंपिंग ग्राउंड बनाना चाहता है। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव पारित कर दिया है। यहां 31.11 एकड़ भूमि अर्थात 1,25,898 वर्ग मीटर जमीन प्राधिकरण अधिग्रहीत करेगा।

रविवार को हुई ग्राम वासियों की बैठक में चमन प्रधान, डॉ. चंद्रपाल शर्मा, श्रीपाल, सुखबीर चौहान, चरने, जीत चौहान, ओमी, राजेन्द्र, हरनन्द, जग्गे आदि समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।