ग्रेनो वेस्ट की ला रेजिडेंशिया सोसायटी में हुए हादसे में बुजुर्ग और उनकी पोती बाल-बाल बचे

Updated Feb 05, 2020 20:58:43 IST | TriCity Today Correspondent

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाउसिंग सोायटियों में घरों के घटिया निर्माण से जुड़ी घटनाएं लगातार हो रही हैं। कभी छत उखड़कर गिर जाती है तो कभी दीवार गिर जाती है। अब बुधवार को ला रेसिडेंशिया सोसायटी में घटिया निर्माण का एक और उदाहरण देखने को मिला। ला रेसिडेंटिया के फ्लैट नंबर टी-9 2001 के निवासी पुनीत कुमार चौधरी का परिवार तब दहल गया...

ग्रेनो वेस्ट की ला रेजिडेंशिया सोसायटी में हुए हादसे में बुजुर्ग और उनकी पोती बाल-बाल बचे
Photo Credit:  Tricity Today
बालकनी में कांच के टुकड़े फैले हुए

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाउसिंग सोायटियों में घरों के घटिया निर्माण से जुड़ी घटनाएं लगातार हो रही हैं। कभी छत उखड़कर गिर जाती है तो कभी दीवार गिर जाती है। अब बुधवार को ला रेसिडेंशिया सोसायटी में घटिया निर्माण का एक और उदाहरण देखने को मिला। ला रेसिडेंटिया के फ्लैट नंबर टी-9 2001 के निवासी पुनीत कुमार चौधरी का परिवार तब दहल गया, जब उनके बेडरूम का दरवाजा उखड़कर खुद-ब-खुद गिर पड़ा। जिससे बालकनी में कांच के टुकड़े फैल गए।

पुनीत कुमार चौधरी ने बताया कि बुधवार को दोपहर बाद लगभग 3 बजे जब उनके ससुर अमरनाथ चौधरी अपनी डेढ़ साल की नाती के साथ खेल रहे थे। बच्ची बालकॉनी में बाहर जाना चाहती थी, इसलिए उन्होंने उसे उठाया और बालकॉनी खोलने की कोशिश की। उन्होंने दरवाजा जैसे ही छुआ, वह गिर गया। दरवाजा बालकॉनी से ग्रिल से टकराया और पूरा कांच चकनाचूर होकर फैल गया। पुनीत कुमार चौधरी ने बताया कि कांच के नुकीले टुकडे़ उनकी बच्ची और सुसर पर आकर गिरा। नीचे पार्क में भी कांच गिरा है। हालांकि, कोई हादसा नहीं हुआ।

अमरनाथ चौधरी ने जूते और फुल पैंट पहने हुए थे। हालांकि, उसके पैरों में चोट लगी और तेज दर्द हो रहा था। छोटी लड़की अपने नाना की गोद में थी, जिससे वह कांच के टुकड़ों की जद में आने से बच गई। परिजनों शुक्र मना रहे हैं कि उस वक्त वह फर्श पर खेल नहीं रही थी।

पुनीत कुमार चौधरी का कहना है कि सोसायटी के मेंटीनेंस डिपार्टमेंट से शिकायत की है। लेकिन, इस मुद्दे पर वहां से कोई जवाब नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 14 (3) के अनुसार स्पष्ट है कि घर में पांच वर्ष तक कोई संरचनात्मक दोष या कारीगरी, गुणवत्ता या सेवाओं में दोष की जिम्मेदारी बिल्डर की होती है। पांच वर्ष की गणना कब्जे की तारीख से की जाती है।

पुनीत कुमार चौधरी का कहना है कि यह बिल्डर की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे दोषों को बिना किसी शुल्क के 30 दिनों के भीतर सुधार ले। दोषों को ठीक करने में प्रमोटर विफल होता है तो आवंटियों को इसके लिए उचित मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार होगा।

कुल मिलाकर एक बार फिर बड़ा होदसा होते-होते बच गया है। अब देखना है कि पुनीत कुमार चौधरी की शिकायत पर बिल्डर क्या कार्रवाई करता है। दरअसल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिल्डरों ने फ्लैट निर्माण करने के लिए घटिया साम्रग्री प्रयोग की हैं। जिससे रोजाना कोई न कोई हादसा होता है।

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