अवतार सिंह भड़ाना आखिर क्यों लड़ेंगे जेवर से चुनाव, पढ़िए खास रिपोर्ट

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 : अवतार सिंह भड़ाना आखिर क्यों लड़ेंगे जेवर से चुनाव, पढ़िए खास रिपोर्ट

अवतार सिंह भड़ाना आखिर क्यों लड़ेंगे जेवर से चुनाव, पढ़िए खास रिपोर्ट

Google Image | Avtar Singh Bhadana

UP Assembly Election 2022 : केवल 34 साल की उम्र में सांसद बनने वाले अवतार सिंह भड़ाना बुधवार को राष्ट्रीय लोक दल में शामिल हो गए हैं। थोड़ी देर पहले अवतार सिंह भड़ाना राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया जयंत चौधरी से मुलाकात करने उनके आवास पर पहुंचे। अवतार सिंह भड़ाना गौतमबुद्ध नगर की जेवर विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे हैं। एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर दिग्गज गुर्जर नेता कहे जाने वाले अवतार सिंह भड़ाना जेवर विधानसभा सीट से ही क्यों टिकट लड़ना चाहते है।

तीन बार कांग्रेस के सांसद रहे
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में अवतार सिंह भड़ाना फरीदाबाद से हार चुके हैं। वह तीन बार कांग्रेस के फरीदाबाद से (1991-1996, 2004-2009 और 2009-2014) और एक बार मेरठ (1999-2004) से सांसद रहे हैं। अब पिछले दो लोकसभा चुनाव (2014 और 2019) में उन्हें फरीदाबाद में भारतीय जनता पार्टी के कृष्णपाल सिंह गुर्जर हरा रहे हैं। लिहाजा, पहले उन्होंने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में एंट्री की। फिर मीरापुर जैसी गुर्जर वोटरों वाली सीट तलाश की। तब तक उत्तर प्रदेश भाजपा में सुरेंद्र सिंह नागर, वीरेंद्र सिंह कांधला और नरेंद्र सिंह भाटी जैसे गुर्जर नेता नहीं थे। लिहाजा, दाल गल गई और वह चुनाव जीत गए। उन्हें पूरा भरोसा था कि यूपी में भाजपा की सरकार बनेगी और वह मंत्री बन जाएंगे।

फरीदाबाद की जनता को भड़ाना पसंद नहीं!
उन्हें भरोसा था कि वह 2019 के लोकसभा चुनाव में कृष्णपाल सिंह गुर्जर को हरा देंगे। अब जरा परिणाम देखिए। अवतार सिंह भड़ाना 2014 का चुनाव 4,66,873 वोट से हारे थे और 2019 में हार का फैसला बढ़कर 6,44,895 हो गया। यह परिणाम भाजपा की देशभर में टॉप-5 जीत में शामिल है। लिहाजा, अवतार सिंह भड़ाना के लिए फरीदाबाद की जनता ने संसद के किवाड़ भेड़ दिए। 

वोटर मिलने की गारंटी नजर आई
अब एक बार फिर अवतार सिंह को उत्तर प्रदेश में गुर्जर वोटरों वाली विधानसभा सीट की तलाश है। जेवर सीट उन्हें मुफीद नजर आ रही है। गुर्जरों के साथ मुसलमान वोटर अच्छे-खासे हैं। फरीदाबाद का बॉर्डर भी है। लिहाजा, इलाके को अपना घर बताना, रिश्तेदारियां निकालना, सेवा करने का वादा और बेटा बनकर चूल्हे-चौके तक पहुंचना आसान रहेगा। सपा-रालोद का गठजोड़ अल्पसंख्यक वोटर मिलने की गारंटी नजर आ रही है।

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