यूपी में यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं रद्द हुईं, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने की घोषणा

BIG BREAKING: यूपी में यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं रद्द हुईं, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने की घोषणा

यूपी में यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं रद्द हुईं, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने की घोषणा

Tricity Today | उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा

यूपी में यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं रद्द हुईं, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने की घोषणा
  • यूपी के उच्च शिक्षा विभाग के विश्वविद्यालयों में करीब 41 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं
  • इस साल शैक्षणिक सत्र 2021-22, 13 सितंबर 2021 से शुरू होगा
  • परीक्षा समयावधि 3 घंटे के स्थान पर एक-डेढ़ घंटे की होगी
  • अगर पहले 10 प्रश्नों के उत्तर दिए जाने थे, तो अब उसके बदले सिर्फ 5 प्रश्नों को हल करना होगा
  • सभी परीक्षाएं अगस्त 2021 के मध्य तक पूरी हो जाएंगी
कोरोना महामारी को देखते हुए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेज में परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इन छात्रों को अगले साल-सेमेस्टर में प्रमोट किया जाएगा। अब से थोड़ी देर पहले उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस बारे में अहम बैठक कर विमर्श लिया गया। इसके बाद यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। हालांकि कुछ खास कोर्स के लिए परीक्षाएं आयोजित कराई जा सकेंगी। लेकिन इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रबंधन पर रहेगी और वह इन परीक्षाओं का आयोजन कराने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।

दरअसल कोरोना महामारी की दूसरी लहर से पूरा देश तबाह रहा। इस वजह से सीबीएसई ओर आईसीएसई बोर्ड समेत सारे देश में राज्य सरकारों ने बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दीं। छात्रों को प्रमोट कर अगली कक्षाओं में भेजा जाएगा। इसके बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली राज्य सरकार सूबे में महामारी को फैलने से रोकने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी परीक्षाएं आयोजित कराने पर बड़ा फैसला ले सकती है। इस संबंध में आज राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। 

कोरोना की वजह से लिया फैसला
बैठक में फैसला लिया गया कि दूसरी लहर से उबर रहे प्रदेश में एक बार फिर परीक्षाएं आयोजित कर कोरोना वायरस को फैलने का मौका नहीं देना चाहिए। इस साल के आखिर तक देश में टीकाकरण अभियान के जरिए सभी नागरिकों को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी। इसके बाद महामारी का खतरा कम हो जाएगा। इसलिए इस साल परीक्षाएं रद्द करना युवाओं के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद जरूरी है। हालांकि कुछ कोर्स और सेमेस्टर के लिए परीक्षाएं आयोजित कराए जाने पर सहमति जताई गई है। लेकिन इस पर अंतिम फैसला विश्वविद्यालय प्रबंधन को करना है। माना जा रहा है कि आखरी साल (एकवर्षीय कोर्स) और आखिरी सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित कराई जा सकेंगी।

5 लाख छात्रों को मिला लाभ
फैसले में राज्य सरकार की तरफ से उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने कहा कि, कोरोना महामारी की वजह से उच्च शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन पठन-पाठन की व्यवस्था की गई। इसके लिए डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए 76 हजार से ज्यादा छात्रों को ई-कंटेंट उपलब्ध कराया गया। प्रदेश के 5 लाख से ज्यादा छात्रों ने घर बैठे इसका लाभ उठाया। महामारी की वजह से उच्च शिक्षा विभाग के अधीन स्थापित विश्वविद्यालयों में कैलेंडर के मुताबिक अध्ययन- अध्यापन कार्य नहीं हो पाया है। परीक्षाएं आयोजित नहीं हो पाई हैं। कुछ विश्वविद्यालयों में पठन-पाठन और परीक्षा पूर्ण रूप से सेमेस्टर पद्धति पर आधारित है। जबकि कई में यह वार्षिक है। 


पिछले वर्ष भी प्रोन्नत किया गया
वार्षिक पद्धति के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में कुछ विश्वविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इन पाठ्यक्रमों में मूल्यांकन का आधार वार्षिक परीक्षा है। महामारी की वजह से सत्र 2019-20 में भी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अध्ययन- अध्यापन कार्य नहीं हो पाया था। परीक्षाएं संपन्न नहीं हो पाई थीं। इस वजह से हम प्रथम वर्ष के छात्रों को दूसरे वर्ष में इस आधार पर प्रोन्नत कर दिया, कि अगले सत्र 2020-21 में वह दूसरे साल की परीक्षा देंगे। इस परीक्षा के परिणाम के आधार पर उन्हें पहले वर्ष के नंबर दिए जाएंगे।”

15 अगस्त तक पूरी होंगी परीक्षाएं
उन्होंने बताया कि, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के अंतिम सेमेस्टर और अंतिम वर्ष के तथा आवश्यक स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं कुछ नियमों के साथ आयोजित कराई जाएंगी। इसके मुताबिक सभी परीक्षाएं अगस्त 2021 के मध्य तक पूरी हो जाएंगी। हालांकि हालात की समीक्षा करते हुए संबंधित विश्वविद्यालय तिथियों की घोषणा करेंगे। प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी। उनके अंकों का निर्धारण लिखित परीक्षा के आधार पर होगा। वायवा आवश्यकतानुसार ऑनलाइन कराई जा सकेगी। परीक्षा प्रणाली का सरलीकरण विश्वविद्यालय से होगा।

31 अगस्त तक जारी होगा परीणाम
राज्य सरकार ने इस बार परीक्षा समय और प्रश्न पत्रों में बड़ा बदलाव किया है। परीक्षा समयावधि 3 घंटे के स्थान पर एक-डेढ़ घंटे की होगी। इसी तरह अगर पहले 10 प्रश्नों के उत्तर दिए जाने थे, तो अब उसके बदले सिर्फ 5 प्रश्नों को हल करना होगा। परीक्षाओं के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाएगा। कोरोना संक्रमण की वजह से अगर कोई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाता है, तो उसे विशेष परीक्षा में सम्मिलित होने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि इसका आखिरी फैसला विश्वविद्यालय प्रशासन करेगा। सभी विश्वविद्यालय 31 अगस्त 2021 तक परिणाम घोषित कर देंगे। 

41 लाख परीक्षार्थी हैं
बताते चलें कि इस वक्त यूपी के उच्च शिक्षा विभाग के विश्वविद्यालयों में करीब 41 लाख छात्र-छात्राएं वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाएं देने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें प्रोन्नत किए जाने के संबंध में भी राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक जिन विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन प्रथम और तृतीय तथा पोस्ट ग्रेजुएशन प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं हो चुकी हैं, वहां ग्रेजुएशन के दूसरे और चौथे सेमेस्टर तथा पोस्ट ग्रेजुएशन के दूसरे सेमेस्टर के अंक के आधार पर अंक दिए जाएंगे। 

13 सितंबर से शुरू होगा नया सत्र
जहां सम-विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं संपन्न नहीं हुई है, वहां मिड टर्म आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित किया जाएगा। स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं संपन्न कराई जाएंगी। राज्य सरकार ने कहा है कि इस साल शैक्षणिक सत्र 2021-22, 13 सितंबर 2021 से शुरू होगा। इससे पहले सभी परीक्षाएं और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। अगर कोई छात्र अपनी परीक्षा के परिणाम से संतुष्ट नहीं है, तो वह 2022 में होने वाले बैक पेपर परीक्षा अथवा वार्षिक परीक्षा के दौरान शामिल हो सकता है।

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