डा.महेश शर्मा के परिजनों की कंपनी को एनजीटी का नोटिस, नोएडा में पेड़ काटकर अस्पताल बनाने का मामला

Tricity Today Correspondent/Noida

NOIDA: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डा.महेश शर्मा के परिजनों की कंपनी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पेड़ काटकर अवैध निर्माण करने और प्रदूषण फैलाने के मामले में नोटिस जारी किया है। कैलाश हेल्थ केयर लिमिटेड नोएडा के सेक्टर 71 में अस्पताल का निर्माण कर रही है। आरोप है कि ग्रीन बेल्ट पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। अवैध रूप से बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है। एनजीटी ने कंपनी के प्रबंध निदेशक और अन्य पदाधिकारियों को नोटिस भेजा है।

नोएडा से सांसद बनने तक डा.महेश शर्मा कैलाश हेल्थ केयर लिमिटेड के चेयरमैन थे। अब उनकी पत्नी डा. उमा शर्मा यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कंपनी नोएडा के सेक्टर 71 में एक और अस्पताल का निर्माण कर रही है। पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ ने याचिका दायर की है। NGT को बताया कि इस अस्पताल के निर्माण में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। यहां ग्रीन बेल्ट पर पेड़ों की कटाई की गई। ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जा किया गया और अवैध निर्माण किया जा रहा है।

राहुल चौधरी ने बताया, इस कंपनी की चेयरमैन डा.महेश शर्मा की पत्नी हैं। डा.महेश शर्मा खुद केंद्र सरकार में पर्यावरण मंत्री हैं। जब उनकी कंपनी अवैध निर्माण कर रही है। पर्यावरण संरक्षण के लिए तय नियमों का पालन नहीं कर रही है तो बाकी किसी पर क्या कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रोजेक्ट के चारों ओर धूूल उड़ती है। सैकड़ों पेड़ों को काट दिया गया है। आसपास रहने वाले लोग परेशान हैं। लेकिन डा.महेश शर्मा के प्रभाव में प्राधिकरण, प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

कैलाश हेल्थकेयर लिमिटेड को व्यवस्थाएं बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस जारी किया था। चेतावनी दी लेकिन उसका कोई अनुपालन नहीं किया गया है। जिसके बाद हमने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया है। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को नोटिस जारी किया है। जवाब मांगा है। हम प्राधिकरण से भी मांग करते हैं कि ग्रीन बेल्ट पर हो रहे अवैध निर्माण का संज्ञान लें और कार्रवाई करें।

कंपनी से जुड़े हैं और विवाद

डा.महेश शर्मा के परिवार के स्वामित्व वाली इस कंपनी से जुड़ा यह कोई पहला विवाद नहीं है। कंपनी ने नोएडा में सबसे पहले सेक्टर 27 में अस्पताल का निर्माण किया था। इसके लिए हुए भूमि आवंटन पर विवाद खड़ा हो गया था। जिसकी सीबीआई ने जांच की थी। नोएडा भूखंड आवंटन घोटाले में आरोपी तत्कालीन चेयरमैन नीरा यादव को सजा हुई थी। इस अस्पताल के निर्माण पर भी गंभीर आरोप हैं। मसलन, भूतल से सार्वजनिक सड़क के नीचे सुरंग का निर्माण किया गया है। जिस पर तमाम शिकायतों के बावजूद अब तक प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की है। यह कंपनी समूह दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, जेवर, खुर्जा, बहरोड, देहरादून में आठ अस्पतालों का संचालन कर रहा है।