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रॉकेट गिरने से 1 मिनट पहले बजता है सायरन, जानिए इजराइल का डिफेंस सिस्टम

Tricity Today Correspondent/New Delhi

 

गाजा पट्टी पर अपने हमलों के लिए दुनियाभर में लोगों की आलोचना का सामना कर रहे इजराइल ने हमास के रॉकेट हमलों से बचने के लिए आधुनिक सिस्टम तैयार किया है। इजराइल के पास आयरन डोम के नाम से मशहूर दुनिया का सबसे बेहतरीन माना जाने वाला मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। पिछले साल हुए संघर्ष में हमास की तरफ से दागे गए 600 से ज्यादा रॉकेट को हवा में नष्ट कर दिया था। आइए जानते हैं कैसे तकनीक के बल पर इजराइल ने अपने नागरिकों को मजबूत सुरक्षा कवच दिया है।

 

एक मिनट पहले चेतावनी
इजराइल में गाजा पट्टी के पास वाले  सायरन लगाए गए हैं। हमास द्वारा दागे गए रॉकेट के पहुंचने से एक मिनट पहले ही सायरन बजना शुरू हो जाता है। हालांकि कुछ स्थानों पर यह 30 सेकेंड पहले ही अलर्ट भेजता है। लगभग हर घर में एक सुरक्षित कमरा तैयार किया गया है जहां रॉकेट का असर नहीं हो पाता। सायरन बजते ही लोग सुरक्षित कमरे में चले जाते हैं। यह सायरन सिस्टम आधुनिक रडार से सीधे तौर पर जुड़े हैं। ये सायरन 100 फुट की ऊंचाई पर लगाए गए हैं और रॉकेट आने से पहले 135 डेसिबल की ध्वनि से अलर्ट भेजते हैं।

 

 

एप्लीकेशन से मदद
इजराइल में लोगों ने फोन में ‘रेड अलर्ट’ नाम की एप्लीकेशन भी डाउनलोड की हुई है। यह एप गाजा पट्टी से रॉकेट के दागते ही लोगों के मोबाइल पर साइरन जैसे साउंड का नोटिफिकेशन देती है। एप से आने वाले नोटिफिकेशन में उस क्षेा का मैप भी आता है जिस दिशा में रॉकेट गिरने वाला होता है।

 

अत्याधुनिक तकनीक वाला ऑयरन डोम
इजराइल का ऑयरन डोम सिस्टम एक चलता फिरता सिस्टम है जिसमें इंटरसेप्टर बैटरी सिस्टम वाली मिसाइलें तैनात की गई हैं जो हवा में ही 90 फीसदी रॉकेट को उड़ा देती हैं। इजराइल के रॉफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम ने इसे तैयार किया है। इसके तहत एक एडवांस सॉफ्टवेयर लगाया गया है। इस सिस्टम के तहत खतरे वाले क्षेों में चलते फिरते रडार लगाए गए हैं। ये रडार 40 मील के क्षेत्र में आने वाले हर रॉकेट को पकड़ लेते हैं।

 

इन रडार के अलावा दो अत्याधुनिक वाहन भी तैनात किए जाते हैं। एक वाहन में टेमीर मिसाइलें तैनात की गई हैं और दूसरे वाहन में इन मिसाइलों के पाथ को दिशा देने वाले उपकरण। इस वाहन को कंट्रोल सेंटर कहा जाता है। इस सिस्टम को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यो बारिश, तूफान हर तरह की परिस्थितियों में काम करता है। महिला सैनिक भी इसे आसानी से ऑपरेट कर सकती है

 

कैसे काम करता है ऑयरन डोम
जैसे ही रडार की पकड़ में कोई रॉकेट आता है तो यह कंट्रोल सेंटर वाले वाहन को मैसेज भेज देता है। यह कंट्रोल सेंटर हमास की तरफ से दागे जाने वाले रॉकेट के पाथ यानि रास्ते को ट्रेस करता है। कंट्रोल सेंटर यह पता करता है कि यह रॉकेट रिहायशी इलाके या सेना के केन्द्र पर तो नहीं गिरेगा। अगर रॉकेट इसी दिशा में आ रहा होता है तो कंट्रोल सेंटर वाला वाहन मिसाइल वाले वाहन को मैसेज भेज देता है और बड़ी तेजी से मिसाइल रॉकेट की दिशा में कूच कर जाती है। कंट्रोल सेंटर इस मिसाइल को रॉकेट से टकराने के लिए इसके पाथ को नियंत्रित करता रहता है।

 

ये मिसाइलें खतरनाक रॉकेट को हवा में ही इस तरह नष्ट कर देती हैं कि इनके टुकड़ों से कोई नुकसान न हो। रॉकेट प्रोजेक्टाइल मोशन में आगे बढ़ता है यानि हम किसी गेंद को दूसरी दिशा में फेंके तो पहले यह ऊपर की दिशा में आती है और फिर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में नीचे की तरफ गिरती है। इस मोशन को प्रोजेक्टाइल मोशन कहते हैं। प्रोजेक्टाइल मोशन में आने वाले रॉकेट के पाथ को पकड़ना इतना आसान नहीं होता। इसलिए 90 फीसदी मामलों में ही सफलता मिल पाती है। 

 

ये तकनीक भी इजराइल के पास
इजराइल ने टोमकार नाम की ऐसी कार बनाई है जिसमें कोई ड्राइवर नहीं होता। यह खुद निर्णय लेने में सक्षम है। इसे किसी रिमोट कंट्रोल से भी संचालित नहीं किया जाता। यह गूगल की ड्राइवरलैस कार से पहले बनाई गई थी। टोमकार आकार में छोटी है। यह अपने आसपास के माहौल की जानकारी जुटाने के लिए लेजर और कैमरे का इस्तेमाल करती है। यह कार जीपीएस और तीन टायर के कंप्यूटर प्रोग्राम का इस्तेमाल करती है जो इसे निर्णय लेने में मदद करते हैं। इजराइल के बॉर्डर पर 8 से 10 टोमकार हमेशा घूमती रहती हैं।

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