बड़ी ख़बरें

बुलंदशहर गैंग रेप पीड़ित लड़की से आजम खान ने मांगी माफी

TricityToday Correspondent/Delhi

 

बुलंदशहर गैंगरेप मामले में दिए गए बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खान ने आज ‘बिना शर्त खेद’ जताया। आजम के माफीनामे को मंजूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई खत्म कर दी है। हालांकि, बड़े पदों पर बैठे लोगों के गौर जिम्मेदारना बयानों पर लगाम लगाने को लेकर सुनवाई चलती रहेगी। उम्मीद है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कोई बड़ा फैसला सुनाएगा।

 

आजम खान ने यूपी के बुलंदशहर में नेशनल हाइवे-91 पर मां-बेटी के साथ हुए सामूहिक बलात्कार को राजनीतिक साजिश करार दिया था। इसी साल 30 जुलाई को हुई इस घटना पर आजम के बयान को बेतुका बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पीड़िता से माफी मांगने को कहा था। आजम के बयान को आधार बनाकर 13 साल की नाबालिग पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। पीड़िता की मांग थी कि आजम खान के खिलाफ महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए एफआईआर दर्ज हो।

 

आजम के वकील और कांग्रेस के बड़े नेता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से मामले को तूल नहीं देने का आग्रह किया और कहा कि उनके मुवक्किल पीड़िता से बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। कोर्ट ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए कहा कि अगर पीड़ित पक्ष इस माफीनामे को मंजूर कर लेगा तो मामला खत्म कर दिया जाएगा। आजम की तरफ से आज दाखिल हलफनामे में कहा गया है, “अगर पीड़िता को मेरे किसी बयान से तकलीफ पहुंची हो या उसने अपमानित महसूस किया हो, तो मैं बिना शर्त खेद जताता हूं।”

 

आजम के बयान की जानकारी मिलने पर कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया था। अगस्त में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति क्या ऐसा बयान दे सकता है? इससे पीड़ित की मनोदशा पर क्या असर पड़ेगा? कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है। ऐसे बयानों से आम आदमी का भरोसा सिस्टम के उठता है।”

 

नेताओं और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की अनर्गल बयानबाजी पर विस्तार से सुनवाई की जरूरत बताते हुए कोर्ट ने इस मसले पर सलाह देने के लिए वरिष्ठ वकील फली नरीमन को अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया था। सुप्रीम कोर्ट ने आज ये साफ किया कि आजम के माफीनामे के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई बंद कर दी जाएगी लेकिन मंत्रियों की बेतुकी बयानबाजी पर सुनवाई करते रहेंगे। इस बारे में विस्तार से सुनवाई के बाद भविष्य में ऐसे बयानों पर लगाम लगाने के लिए नियम बनाए जाएंगे।

 

कोर्ट ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर बड़े पदों पर बैठे लोगों को कुछ भी बोलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। ऐसे बयानों की लक्ष्मण रेखा तय करनी जरूरी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से बड़ा फैसला आएगा।