सावधान! हफ्ते में दो पेरासिटामोल बना सकती हैं बहरा

Tricity Today Reporter

अगर आप दर्द से छुटकारा पाने के लिए दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाइए। एक नए शोध में पेनकिलर के बेहद खतरनाक होने की बात सामने आई है। इस शोध के मुताबिक हफ्ते में दो बार पेरासिटामोल और आईबुप्रोफेन जैसी दवा लेने से इंसान पूरी तरह से बहरा हो सकता है। पेनकिलर लेने से महिलाओं को सबसे अधिक खतरा है। अमेरिका में हुए इस शोध के मुताबिक अगर महिलाएं छह साल तक हर हफ्ते दो बार पेरासिटामोल या फिर आईबुप्रोफेन की गोली खाती हैं तो वे हमेशा के लिए सुनने की शक्ति खो देंगी।

शोध के मुताबिक बहरेपन की शिकार हर 20वीं महिला की सुनने की शक्ति जाने की वजह दर्द निवारक दवाएं हैं। इस हिसाब से देखें तो पेनकिलर पांच फीसदी महिलाओं के बहरेपन के लिए जिम्मेदार है। इस शोध में महिलाओं को पेनकिलर न लेने की सलाह दी गई है।  शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि सिर दर्द और कमर दर्द से राहत पाने के लिए अधेड़ उम्र की महिलाएं पेनकिलर का इस्तेमाल अधिक करती हैं। अमेरिका में हुए एक अन्य शोध के मुताबिक हर 12वीं महिला सप्ताह में दो बार पेरासिटामोल का इस्तेमाल करती है। इससे उनके पूरी तरह से बहरे होने की संभावना बढ़ जाती है।

फेफड़ों के कैंसर से लड़ने में   मददगार आईबुप्रोफेन

आईबुप्रोफेन भले ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो लेकिन ओहियो यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में दावा किया गया है कि आईबुप्रोफेन की कम मात्रा लेने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम हो जाता है। हालांकि शोध कर्ताओं का मानना है कि इस दवा के खतरनाक साइड इफेक्ट भी हैं।

  पेनकिलर से दोगुना लाभदायक ध्यान लगाना

‘जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस’ पत्रिका में छपे एक शोध के मुताबिक ध्यान लगाना (मेडिटेशन) दर्द की दवा मार्फिन से दोगुना अधिक लाभदायक है। यह मॉर्फिन के मुकाबले दर्द में दोगुना आराम पहुंचाता है। मेडिटेशन से दिमाग की दर्द सहने की क्षमता बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों ने यह शोध बिल्कुल स्वस्थ 75 लोगों के ऊपर किया। उन्होंने इन लोगों को तीन ग्रुप में बांट दिया। एक ग्रुप के लोगों से मेडिटेशन कराया बाकी दो ग्रुप के लोगों को ऐसे ही छोड़ दिया। इसके बाद इनके दिमाग का एमआरआई स्कैन किया गया। फिर इन लोगों को 120 डिग्री के तापमान के साथ दर्द पहुंचाने की कोशिश की। मेडिटेशन नहीं करने वाले लोगों को मॉर्फिन और दर्द कम करने की दूसरी दवा दी गई। इन तीनों ग्रुप के लोगों को दर्द कम महसूस हुआ लेकिन जिन लोगों ने मेडिटेशन किया था उनका दर्द एक तिहाई कम हो गया था। एमआरआई स्कैन से पता चला कि मेडिटेशन करने वालों को कष्ट बिना मेडिटेशन करने वालों के मुकाबले 44 फीसदी कम था। 

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