यूपी में होम आइसोलेशन के लिए गाइडलाइन जारी, मरीज को शपथ पत्र भी देना होगा

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उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए सोमवार को होम आइसोलेशन की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। राज्य के टॉप अफसरों के साथ मीटिंग में विचार-विमर्श करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह फैसला लिया है। अब स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने होम आइसोलेशन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। जिसमें मरीज, उसके परिवार और चिकित्सकों के लिए नियम-कायदे तय हैं। इतना ही नहीं मरीज को एक शपथ पत्र भी देना होगा। जिसमें वह कहेगा कि अपनी मर्जी से होम आइसोलेशन होना चाहता है।

अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उपचार कर रहे चिकित्सक ऐसे व्यक्ति को लक्षण सहित कोरोना मरीज के रूप में चिन्हित करेंगे। मरीज के घर पर खुद को आइसोलेट करने और परिवार के बाकी सदस्यों को क्वारंटाइन करने की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। घर में कम से कम 2 शौचालय अवश्य होने चाहिए। ऐसे रोगी जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता किसी कारणवश कमजोर है, उन्हें होम आइसोलेशन की अनुमति नहीं दी जाएगी। एचआईवी से ग्रसित, अंग प्रत्यारोपण से प्रभावित और कैंसर का उपचार करवा रहे रोगी होम आइसोलेट नहीं हो सकते हैं।

मरीज की 24 घंटे देखभाल करने के लिए एक व्यक्ति उपलब्ध होना चाहिए। देखभाल करने वाले व्यक्ति और चिकित्सालय के बीच संपर्क होना अनिवार्य है। देखभाल करने वाले व्यक्ति को रोगी के नजदीकी संपर्क में आने से बचने के लिए प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। चिकित्सक का परामर्श लेकर देखभाल करने वाले व्यक्ति को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन प्रोफाइललेक्सिस दवा लेनी होगी।

मरीज और देखभाल करने वाले व्यक्ति को अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना होगा। ऐप को ब्लूटूथ और वाईफाई के माध्यम से हमेशा सक्रिय रखना होगा। दिन में दो बार इस ऐप पर सूचना अपडेट करनी होगी। अगर स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं है तो रोगी कोविड-19 नियंत्रण कक्ष के दूरभाष पर अपने स्वास्थ्य की जानकारी दिन में दो बार देगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से विकसित किए गए आइसोलेशन ऐप को मरीज अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड करेगा।

होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को एक किट खरीदनी होगी। जिसमें पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, मास्क, ग्लब्स, सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली वस्तुएं होनी चाहिए। रोगी को एक शपथ पत्र देना होगा, जिसमें वह लिखकर देगा कि वह क्वारंटाइन और आइसोलेशन की गाइडलाइंस का अनुपालन करेगा।

ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा
होम आइसोलेशन में अपना इलाज कर रहे रोगी को अगर अपने अंदर कुछ गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तत्काल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और नियंत्रण कक्ष से संपर्क करके अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा। इन लक्षणों में सांस लेने में कठिनाई, शरीर में ऑक्सीजन की कमी, सीने में लगातार दर्द या भारीपन होना, मानसिक भ्रम की स्थिति या सचेत रहने में असमर्थता, बोलने में परेशानी होने, चेहरे या किसी अंग में कमजोरी आने, होठों या चेहरे पर नीलापन आने पर अस्पताल जाना होगा।

होम आइसोलेट मरीज पर नजर रखेगा स्वास्थ्य विभाग
होम आइसोलेट किए गए मरीजों पर स्वास्थ्य विभाग भी नजर रखेगा। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और कंट्रोल रूम के अधिकारी लगातार ऐसे मरीजों से बात करेंगे। इनसे शरीर के तापमान, शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा, पल्स रेट और ब्लड प्रेशर जैसी जानकारी लेकर नोट करते रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारी मरीज की देखभाल करने वाले व्यक्ति के संपर्क में रहेंगे। होम आइसोलेशन में रखे गए रोगी का विवरण नियमित रूप से कोविड-19 पर अपडेट किया जाएगा। जिला स्तरीय अधिकारी इन सूचनाओं का अनुसरण करेंगे। होम आइसोलेशन का प्रोटोकॉल तोड़ने या उपचार की आवश्यकता आने पर रोगी को तत्काल अस्पताल में शिफ्ट करना होगा।

होम आइसोलेशन समाप्त होने की यह शर्त होगी
आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों का आइसोलेशन कोविड-19 से पॉजिटिव होने के 10 दिनों के बाद या पिछले 3 दिनों में बुखार ना आने की स्थिति में समाप्त माना जाएगा। इसके बाद 7 दिनों तक रोगी घर में ही रहकर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करेगा। होम आइसोलेशन की समाप्ति पर टेस्टिंग की आवश्यकता नहीं होगी।

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