अभी-अभी: जेवर एयरपोर्ट पर यूपी कैबिनेट ने लिया बड़ा फैसला, सरकार के विभाग मिलकर अब यह काम करेंगे

Google Image | UP Cabinet passes a big decision about Jewar Airport



मंत्रिपरिषद ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर की स्थापना के लिये हवाई अड्डा क्षेत्र के दायरे में आने वाले लोक निर्माण विभाग और ऊर्जा विभाग की परिसम्पत्तियों व अन्य अवस्थापनाओं सम्बन्धित कार्यों को उनके विभागीय बजट से वहन किये जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृत किया है। मतलब अब एयरपोर्ट तक बिजली और सड़क पहुंचने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) को इसके लिए खर्च वहन नहीं करना पड़ेगा। मंगलवार की देर शाम आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक हुई है।

आपको बता दें कि मंत्रि परिषद द्वारा पांच जून 2018 की बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर का निर्माण निजी—सार्वजनिक भागीदारी के तहत किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा इसके निर्माण के लिये जमीन उपलब्ध करायी गयी है। इसके लिये वैश्विक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विकासकर्ता के तौर पर 'ज्यूरिख एयरपोर्ट इण्टरनेशनल एजी का चयन किया गया है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर का निर्माण छह महीने में शुरू हो जाएगा। एयरपोर्ट की विकासकर्ता स्विस कंपनी से अनुबंध होने के बाद उसे 1334 हेक्टेयर जमीन सौंप दी जाएगी। कंपनी एयरपोर्ट का मास्टर प्लान (नक्शा) प्रस्तुत करेगी। इस पूरी प्रक्रिया में छह महीने का समय लग जाएगा। एयरपोर्ट के शिलान्यास की तिथि सरकार तय करेगी।

जेवर एयरपोर्ट के लिए सबसे अधिक बोली स्विस कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी ने लगाई थी। भारत में काम करने के लिए यहां यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी रजिस्टर्ड कराई है। 7 अक्टूबर को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) और यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के बीच होने वाले अनुबंध पर दस्तखत होंगे। अनुबंध होने के छह महीने के भीतर एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। अनुबंध के बाद कंपनी को जमीन सौंप दी जाएगा।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिये गये इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि एयरपोर्ट का पहला चरण 1334 हेक्टेयर में बनाया जाना है। जमीन का अधिग्रहण काफी पहले पूरा हो चुका है। अब विस्थापित होने वाले परिवारों को बसाने के लिए काम चल रहा है।

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