Noida News : घर का सपना अभी नहीं होगा पूरा, 50 बिल्डरों ने अथॉरिटी के पैकेज पर नहीं किया साइन, जानिए क्यों...

नोएडा | 4 महीना पहले | Nitin Parashar

Tricity Today | Symbolic



Noida News : नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अटकी आवासीय परियोजनाओं के करीब ढाई लाख फ़्लैट खरीदारों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल, बिल्डर बायर्स समस्या को खत्म करने के लिए बनाई गई अमिताभ कांत कमेटी की सिफारिशों के लागू होने के बाद सिर्फ पांच बिल्डरों ने मात्र 5.4 करोड़ रुपये जमा करवाए हैं, जबकि 31 बिल्डरों पर छूट के बाद 6400 करोड़ रुपये की देनदारी बन रही है। जिन बिल्डरों ने पैसे जमा कराए हैं। उन पर ज्यादा बकाया नहीं था। प्राधिकरण की ओर से दबाव बनाए जाने के बाद भी बड़े बिल्डर पैसे जमा करने के मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं।

कुल बकाया 8 हजार करोड़
बीते दिनों सात बिल्डरों ने प्राधिकरण के साथ वार्ता के बाद बकाया राशि जमा करने की सहमति दी थी। इनमें से पांच बिल्डरों ने ही पैसे जमा कराए। बाकी के दो बिल्डरों ने अभी पैसे जमा नहीं कराए हैं। लेकिन प्राधिकरण के पैकेज पर साइन कर दिया है। अभी भी नोएडा के 50 बिल्डरों के साथ प्राधिकरण के पैकेज पर साइन करने के बाबत सहमति नहीं बन पाई है। इनमें से 24 बिल्डर ऐसे हैं जो कि प्राधिकरण से वार्ता कर पैकेज साइन करने पर सहमति भी दे चुके हैं। नोएडा की पूरी हो चुकी 31 परियोजनाओं का कुल बकाया 8000 करोड़ है। इनको कोविड काल की छूट देने के बाद करीब 20 प्रतिशत राशि कम हो रही है। ऐसे में छूट के बाद बकाये की राशि 6400 करोड़ रुपये होगी।

अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें मंजूर
नोएडा समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर और देशभर में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में एक समिति का गठन 31 मार्च 2023 को किया गया था। समिति में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के टॉप ब्यूरोक्रेट्स शामिल थे। इस कमेटी को दिल्ली-एनसीआर में अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का रास्ता बताने का जिम्मा दिया गया था। इस कमेटी ने बिल्डर्स से लेकर बायर्स तक की समस्याओं और हर पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद 24 जुलाई 2023 को अपनी रिपोर्ट सबमिट की। सरकार ने उस रिपोर्ट को गौतमबुद्ध नगर के तीनों विकास प्राधिकरणों को भेजा था। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने समिति की करीब आधी सिफारिशों को कुछ बदलाव के साथ लागू करने का निर्णय लिया है।

कमेटी की जरूरत क्यों पड़ी 
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी क्षेत्र में आने वाले दर्जनों बिल्डर्स के तमाम प्रोजेक्ट सालों से अटके पड़े हैं। किसी के पास फंड की कमी है तो किसी का प्राधिकरण पर बकाया है। इसके अलावा कई बिल्डर आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे हैं। कुछ प्रोजेक्ट कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसे हैं।

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