22 साल पुराने अपहरण के मामले में हैं आरोपी : पूर्व मंत्री अमरमणि के विरुद्ध कुर्की का आदेश, पुलिस की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी

Google Image | पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी



Uttar Pardesh News : अपहरण के 22 साल पुराने मामले में आरोपी पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के विरुद्ध एमपी-एमएलए कोर्ट ने कुर्की का आदेश दिया है। अदालत ने अमरमणि के वकील द्वारा प्रस्तुत गिरफ्तारी वारंट को समाप्त करने की अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह आदेश न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि की कोर्ट ने दिया है।

बस्ती की कोर्ट में पेश होने का था आदेश
पिछले दिनों मेडिकल बोर्ड ने अमरमणि त्रिपाठी के उपचार विवरण को देखने के बाद स्पष्ट किया था कि वह अवसाद ग्रस्त हैं और इस बीमारी में उन्हें न्यायालय में हाजिर किया जा सकता है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर गोरखपुर के जेल अधीक्षक को 16 अक्टूबर को अमरमणि को बस्ती की कोर्ट में उपस्थित करने का आदेश दिया गया था। लेकिन, उन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय ने एसपी बस्ती गोपाल कृष्ण चौधरी को आदेश दिया था कि वह टीम गठित कर अमरमणि को एक नवंबर को न्यायालय में गिरफ्तार कर प्रस्तुत करें। 

पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली भी आपत्तिजनक
 बुधवार को कोतवाली पुलिस ने न्यायालय में आख्या प्रस्तुत की कि अमरमणि को उनके 19ए हुमायूंपुर दक्षिणी कोतवाली गोरखपुर के पते पर दबिश डालकर खोजने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पता नहीं चल पाया। पुलिस की रिपोर्ट को देखने के बाद तल्ख टिप्पणी करते न्यायालय ने कहा कि सामान्य गरीब अपराधियों के मामले में पुलिस अपेक्षा से अधिक पैरवी करती नजर आती है। वहीं, प्रभावशाली और दुर्दान्त अपराधियों के मामले में भयाकुल दिखती है। प्रश्नगत मामले में पुलिस अधीक्षक बस्ती की कार्यप्रणाली भी आपत्तिजनक है। न्यायालय ने अमरमणि के अधिवक्ता जंग बहादुर सिंह, राकेश मिश्रा द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। इस प्रार्थना पत्र में अमरमणि के अधिवक्ता द्वारा 16 अक्टूबर को न्यायालय द्वारा जारी किए गए गिरफ्तारी आदेश को रोकने की याचना की गई थी।

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