बड़ी खबरः बसपा प्रमुख मायावती की दो टूक- ‘कांग्रेस के नक्शे कदम पर चल रही भाजपा, होगा वही हश्र’

Google Image | बसपा प्रमुख मायावती



उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार करोड़ों बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में नाकाम रही हैं। युवा जीवन यापन के लिए मजदूरी करने और पकौड़े तलने तक को तैयार हैं। उन्होंने भाजपा को सख्त संदेश भी दिया। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी भी कमोबेश कांग्रेस की तरह ही काम कर रही है और उसी नक्शे कदम पर चल रही है। वह दिन दूर नहीं, जब इस पार्टी को भी देश की जनता हाशिए पर धकेल देगी। यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर दिखाई देगा। 

आज सुबह एक के बाद एक तीन ट्वीट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने करोड़ों बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने पर अपनी चिंता जाहिर की। सुप्रीमो मायावती ने लिखा, “यूपी व पूरे देश भर में करोड़ों युवा व शिक्षित बेरोजगार लोग सड़क किनारे पकौड़े बेचने व अपने जीवनयापन के लिए मजदूरी आदि करने को भी मजबूर हैं। उनके माँ-बाप व परिवार जो यह सब देख रहे हैं, उनकी व्यथा को समझा जा सकता है। यह दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण व अति-चिन्ताजनक है। बीएसपी देश में नौजवानों के लिए ऐसी भयावह स्थिति पैदा करने के लिए केन्द्र में बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस को भी बराबर की जिम्मेदार मानती है।” 

कांग्रेस जैसा होगा हाल
बसपा प्रमुख ने कांग्रेस के हाशिये पर जाने का उदाहरण देते हुए भाजपा को चेतावनी दी। उन्होंने लिखा है, “कांग्रेस ने भी लम्बे अरसे तक यहां एकछत्र राज किया व अपने कार्यकलापों की भुक्तभोगी बनकर कांग्रेस, केन्द्र यूपी व काफी राज्यों की भी सत्ता से बाहर हो गई। यदि बीजेपी भी, कांग्रेस पार्टी के नक्शेकदम पर ही चलती रही तो फिर इस पार्टी की भी वही दुर्दशा होगी जो कांग्रेस की हो चुकी है। इस पर बीजेपी को गम्भीरता से जरूर सोचना चाहिये। क्योंकि इनकी ऐसी नीति व कार्यकलापों से न तो जनकल्याण और न ही देश की आत्मनिर्भरता संभव हो पा रही है।”

सवर्णों को साधेगी बसपा
विगत दिनों ही बसपा ने ऐलान किया था कि वह यूपी और उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरण साधने के लिए सतीश चंद्र मिश्र को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें बीएसपी मीडिया सेल का राष्ट्रीय कोओर्डिनेटर बनाया गया है। इससे पहले साल 2007 में बहुजन समाज पार्टी सवर्णों के दम से सत्ता हासिल करने में कामयाब रही थी। तब मायावती ने ब्राह्मण-दलित गठजोड़ के फॉर्मूले को अपनाया था। उस फॉर्मूले के सूत्रधार भी सतीश चंद्र मिश्र थे। 

सपा-बसपा का गठजोड़ था
एक बार फिर उनके चेहरे को आगे कर बसपा 2007 के रिकॉर्ड को हासिल करने में जुटी है। हालांकि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन दोनों पार्टियों को करारी हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए था। उन्होंने कहा था कि सपा का संगठन कमजोर हो गया है। इस वजह से बसपा को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बाद दोनों का गठबंधन टूट गया था। 

पहले गठबंधन में लड़ा चुनाव
बिहार में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में BSP और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने मिलकर चुनाव लड़ा था। उसके बाद से ये कयास लगाए जा रहे थे कि यूपी में भी AIMIM और BSP मिलकर विधानसभा चुनाव लडेंगे। इस बारे में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हलचल तेज थी। लेकिन रविवार को बसपा प्रमुख ने ऐसी खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि, मीडिया के एक न्यूज चैनल में यह खबर प्रसारित की जा रही है कि यूपी में आगामी विधानसभा आमचुनाव औवेसी की पार्टी AIMIM व बीएसपी मिलकर लड़ेगी। यह खबर पूर्णतः गलत, भ्रामक व तथ्यहीन है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है तथा बीएसपी इसका जोरदार खण्डन करती है। 

अकेले चुनाव लड़ेगी बसपा
वैसे इस सम्बन्ध में पार्टी द्वारा फिरसे यह स्पष्ट किया जाता है कि पंजाब को छोड़कर, यूपी व उत्तराखण्ड प्रदेश में अगले वर्ष के प्रारंभ में होने वाला विधानसभा का यह आमचुनाव बीएसपी किसी भी पार्टी के साथ कोई भी गठबन्धन करके नहीं लड़ेगी अर्थात् अकेले ही लड़ेगी। बीएसपी के बारे में इस किस्म की मनगढ़न्त व भ्रमित करने वाली खबरों को खास ध्यान में रखकर ही अब बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद सतीश चन्द्र मिश्र को बीएसपी मीडिया सेल का राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बना दिया गया है। 

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