कृषि बिल वापस : नाराज किसानों को साधने की कोशिश, विपक्ष बोला सत्ता जाने का सता रहा था डर

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लखनऊ। देश के 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरू नानक देव जयंती के प्रकाश उत्सव पर कृषि के तीनों बिल वापिस लेकर किसानों को एक बड़ा तोहफा दिया है। पीएम मोदी ने शुक्रवार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का फैसला लिया और विरोध करने वाले किसानों से आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया। वहीं पीएम के इस फैसले के बाद विपक्ष की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद व यूपी प्रभारी संजय सिंह ने कहा ये मोदी के अन्याय पर किसान आंदोलन की जीत की ढेरों बधाई।

हार के डर से वापस लिए बिल
संजय सिंह ने कहा भारत के अन्नदाता किसानो पर एक साल तक घोर अत्याचार हुआ है। जिसमे सैंकड़ों किसानो की शहादत हुई। अन्नदाताओं को आतंकवादी कह कर अपमानित किया। आखिर इस पर मौन क्यों रहे प्रधानमंत्री मोदी ? देश समझ रहा है। ये तीनो बिल इसलिए वापस लिए गए हैं। चुनाव दर चुनाव भारतीय जनता पार्टी को किसान सबक सिखा रहें थे। इसलिए हार के डर से ये तीनो काला क़ानून वापस लिया है। उन्होंने कहा की आजादी के बाद से यह सबसे लंबा चलने वाला किसान आंदोलन रहा। जिसमें तमाम तरह की यातनाएं उनके ऊपर की गई। इस आंदोलन के दौरान 750 किसानों ने अपनी शहादत दी। 

बीजेपी भूल जाए तानाशाही
वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने तंज कसते हुए कहा कि कमाल है भारतीय जनता पार्टी का जब किसी किसान आंदोलन में सैकड़ों किसानों की जान चली गई तब कभी भी उनकी तरफ ध्यान नहीं गया। लेकिन अब जब उन्हें एहसास हो गया है कि उत्तर प्रदेश में उनकी सत्ता जा रही है। किसान उनके विरोध में खड़ा है सत्ता जाने का डर जब सताने लगा तब उन्होंने तीनों कृषि बिल वापस लेने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि यह होती है लोकतंत्र की ताकत इसलिए बीजेपी भूल जाए तानाशाही। इस हिंदुस्तान में सिर्फ लोकतंत्र चलेगा।

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