पतंजलि को एक रुपये में होगी 455 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री

Updated Dec 29, 2019 04:41:02 IST | TricityToday Correspondent

बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी रियायतें दी हैं। कंपनी ग्रेटर नोएडा में मेगा फूड पार्क और यूनिवर्सिटी की स्थापना करेगी। जमीन की आवंटन दरों में 25 फीसदी छूट मिलेगी। जमीन की रजिस्ट्री के वक्त पतंजलि ट्रस्ट को स्टांप ड्यूटी नहीं देनी पड़ेगी। केवल एक रुपये में 455 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री सरकार करेगी।

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ग्रेटर नोएडा। बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी रियायतें दी हैं। कंपनी ग्रेटर नोएडा में मेगा फूड पार्क और यूनिवर्सिटी की स्थापना करेगी। जमीन की आवंटन दरों में 25 फीसदी छूट मिलेगी। जमीन की रजिस्ट्री के वक्त पतंजलि ट्रस्ट को स्टांप ड्यूटी नहीं देनी पड़ेगी। केवल एक रुपये में 455 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री सरकार करेगी।
 

पतंजलि ने ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने और यूनिवर्सिटी बनाने के लिए यमुना प्राधिकरण से 700 एकड़ जमीन की मांग की थी। आचार्य बालकृष्ण की इस कंपनी ने सरकार से करीब 1.25 लाख लोगों को रोजगार देने और राज्य में 2,110 करोड़ रुपये पूंजी निवेश का वादा किया है। बदले में इसके लिए सरकार से रियायतें मांगी। सरकार ने रियायतें दे दी हैं।

 

कंपनी को हुआ करीब 500 करोड़ का फायदा
यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा.अरुणवीर सिंह ने बताया कि पतंजलि को आवंटन दरों में 25 प्रतिशत छूट मिलेगी। वह 455 एकड़ में से 25 एकड़ भूमि पर यूनिवर्सिटी बनाएंगे। इस 25 एकड़ जमीन की दरों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। जमीन की रजिस्ट्री के वक्त कंपनी को स्टांप ड्यूटी नहीं देनी होगी। सरकार ने 100 फीसदी छूट दे दी है। कंपनी को जमीन की कीमत में करीब 400 करोड़ रुपये, स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क से करीब 100 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।

 

दूसरी कंपनी को जमीन बेचने की अनुमति दी गई
कुल आवंटित क्षेत्रफल में से 20 प्रतिशत यानि 91 एकड़ भूमि पतंजलि दूसरी कंपनियों को बेच सकती है। आवंटन के बाद सात वर्ष तक यह अनुमति रहेगी। जमीन बेचने के वक्त केवल आवंटन दरों का भुगतान यमुना प्राधिकरण को क्रेता कंपनी करेगी।

 

जीएसटी और दूसरे टैक्स भी माफ
पतंजलि अपने उत्पादन के लिए राज्य में कहीं से भी कच्चा माल खरीद सकेगी। कंपनी को मंडी शुल्क नहीं देना पड़ेगा। उसके बनाए गए उत्पादों पर प्रदेश सरकार अपने हिस्से का जीएसटी नहीं लेगी।

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