राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की तीन किताबों का हुआ विमोचन : बोले- केवल गांधी के रास्ते पर चलकर दुनिया बचेगी

Tricity Today | Harivansh Narayan Singh



Greater Noida : पत्रकार, लेखक, चिंतक और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की 3 नव प्रकाशित पुस्तकों का शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) में विमोचन किया गया। तीनों किताबों का पूर्वावलोकन वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला ने किया। इस अवसर पर हरिवंश ने कहा, "आइंस्टीन के बाद दुनिया के सबसे काबिल फिजिसिस्ट स्टीफन हॉकिंग्स ने जिन खतरों का पूर्वानुमान लगाया था, वह सारे हमारे सामने आकर खड़े हो गए हैं। इनसे बचाव का बस एक ही उपाय महात्मा गांधी का बताया रास्ता है, लेकिन उस पर अकेले भारत को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चलना पड़ेगा।"
हरिवंश की तीन किताबें एकसाथ प्रकाशित हुई हैं
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की तीन किताबें एक साथ प्रकाशित हुई है तीनों की विषय वस्तु अलग-अलग है इनमें 'पथ के प्रकाश पुंज' युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करती है इस किताब के जरिए हरिवंश ने आत्मक अध्ययन आत्मबोध और अपने जीवन के संस्मरण को समाहित किया है स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी से लेकर के कामराज, केके सिन्हा, बाबा आमटे अकियो मोरिता, मैडम क्यूरी और रुसी लाला जैसे चरित्रों से जुड़े प्रसंग व संस्मरण शामिल किए हैं। दूसरी किताब उनकी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आधारित है। जिसमें उन्होंने कैलाश मानसरोवर के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पक्षों को शानदार ढंग से पेश किया है। उनकी यह किताबें युवाओं को भारतीय समाज, संस्कृति, अध्यात्म, शिक्षा और प्राचीन परंपराओं को समझने के लिए प्रेरित करती हैं।

गांधी के मार्ग पर चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं : हरिवंश
इस अवसर पर हरिवंश ने कहा, "इस वक्त पूरी दुनिया वैश्वीकरण और बाजारीकरण की चपेट में है। कॉरपोरेट जगत जबरिया उपभोक्तावाद को बढ़ा रहा है। ज्यादा उपयोग बढ़ने के कारण उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। इस धरती का बेतहाशा दोहन हो रहा है। पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। महात्मा गांधी ने आज से 100 साल पहले इस पर चिंता जाहिर की थी। यूरोप और उसके बाद पूरी दुनिया में हुई औद्योगिक क्रांति ने प्रकृति को भारी क्षति पहुंचाई है। इस पर तमाम वैज्ञानिक चिंता जाहिर कर चुके हैं। उनमें स्टीफन हॉकिंग का नाम सबसे नया और महत्वपूर्ण है। महात्मा गांधी ने ना केवल इस समस्या पर चिंता जताई बल्कि इससे बचाव का रास्ता भी बताया है। उनके रास्ते पर चलकर प्रकृति और पृथ्वी को बचाया जा सकता है, लेकिन अकेला भारत उस रास्ते पर नहीं चल सकता है। पूरी दुनिया को चलना पड़ेगा। अगर हम अकेले उस रास्ते पर चले तो पिछड़ जाएंगे।"
तीनों किताबों में अध्यात्मिक चिंतन है : शंभूनाथ शुक्ला
हरिवंश की तीनों किताबों का पूर्वावलोकन वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला ने किया। उन्होंने कहा, "इन तीनों किताबों में आध्यात्मिक बोध है। वर्तमान समाज की चिंता परिलक्षित हो रही है। खास बात यह है कि हरिवंश केवल चिंता व्यक्त नहीं कर रहे हैं, बल्कि इन चिंताओं से उबरने के विकल्प भी पेश कर रहे हैं। उन्होंने इन तीनों किताबों में ऐसी तमाम महान विभूतियों के जीवन और उनसे जुड़े अपने संस्मरणों को पिरोया है जो वर्तमान समाज और युवा पीढ़ी को रास्ता दिखा सकते हैं।" शंभूनाथ शुक्ला ने आगे कहा, "स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, विनोबा भावे, बाबा आमटे, महात्मा गांधी, मैडम क्यूरी, अकियों मोरिता, के कामराज और तमाम महान चरित्रों के बारे में कुछ रोचक व नई जानकारियां हमें इन किताबों में मिलती हैं। साथ ही यह किताबें और तमाम दूसरी महत्वपूर्ण किताबों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।"
हरिवंश जी ने प्रत्येक क्षेत्र में मील के पत्थर स्थापित किए : डॉ.हरिवंश चतुर्वेदी
बिमटेक के निदेशक डॉ.हरिवंश चतुर्वेदी ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए कहा, "हरिवंश जी वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए ना केवल मार्गदर्शक हैं, बल्कि शोध का विषय भी हैं। एक पत्रकार की भूमिका में उन्होंने मृतप्राय: दैनिक प्रभात अखबार को बिहार, झारखंड और उड़ीसा का अग्रणी समाचार पत्र बना दिया। हरिवंश जी के नेतृत्व में अखबार ने ना केवल संपादकीय क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी यह अखबार खड़ा हो गया। मैनेजमेंट के छात्रों के लिए हरिवंश जी का काम एक केस स्टडी है। जिस पर हम लोग खुद काम कर रहे हैं। यह तीनों किताबें भी छात्रों और युवाओं के लिए बेहद लाभदायक साबित होंगी।" बिमटेक के तमाम छात्र-छात्राओं ने तीनों पुस्तकों का अध्ययन किया और हरिवंश से प्रश्न किए।
गांधी पर उठने वाले सवालों का जवाब देती है किताब : पंकज पाराशर
हरिवंश की किताब 'पथ के प्रकाश पुंज' पर नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाराशर ने समीक्षात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "इस किताब में महात्मा गांधी पर आधारित 3 अध्याय बेहद मार्मिक हैं। महात्मा गांधी के अफ्रीका से लौटकर भारत आने और आजादी के लिए काम शुरू करने, उस वक्त की दोहरी चुनौतियों व उन पर पार पाने की गहन जानकारी देती है। बताती है कि महात्मा गांधी कैसे एक तरफ अंग्रेजों से लड़े और दूसरी तरफ भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। किताब में महात्मा गांधी के अंतिम दिनों पर लिखा गया अध्याय बेहद मार्मिक है। कई घटनाओं को पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं और एक महान व्यक्तित्व की अंतिम दिनों में बेबसी को पूरी तरह बताता है। कस्तूरबा और देसाई की मृत्यु के बाद गांधी का एकाकीपन बेहद गहराई से सामने रखा गया है। इसी दौरान महात्मा गांधी किस तरह अपने अनुयायियों की सत्ता लोलुपता के सामने स्वयं को तिरस्कृत महसूस करते हैं, यह अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। उन्होंने आगे कहा, "भारत विभाजन क्यों? विभाजन के बाद मुसलमानों का भारत में रह जाना क्यों? गांधी ने मुसलमानों का पक्ष लिया? गांधी से पूछे जाने वाले ऐसे सवालों का जवाब यह किताब देती है। मौजूदा पीढ़ी के पूर्वाग्रहों को दूर में करने में यह किताब सफल हो सकती है।"

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