Greater Noida: दो हफ्ते से चल रहा था कोरोना का इलाज, मौत के बाद बताया कि रिपोर्ट नेगेटिव थी, परिजनों ने किया हंगामा

Google Image | प्रतीकात्मक फोटो



कोरोना के संक्रमित मरीजों और इस महामारी के कारण हो रही मौत के आंकड़ों को लेकर चल रही हेराफेरी अब भी थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में एक व्यक्ति की मौत के बाद ऐसा ही कुछ अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। ग्रेटर नोएडा के एक कोविड अस्पताल में जारचा के निवासी एक व्यक्ति की मौत हो गई। उसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। इनका कहना है कि 11 जुलाई से भर्ती मरीज का कोरोना का उपचार चल रह था। शुक्रवार की सुबह मरीज की मौत हुई तो बताया गया कि कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन उन्हें भ्रमित कर रहा है। बाद में अस्पताल के दो कर्मियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया गया है।

रसूलपुर गांव के निवासी राम अवतार सिंह राघव (45 वर्ष) एनटीपीसी में संविदा पर कार्यरत थे। चक्कर आने और अन्य परेशानी के बाद उन्हें नोएडा के सेक्टर-135 स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इस अस्पताल ने बिना कोरोना जांच के राम अवतार को भर्ती कर लिया था। जांच में पता चला कि दिमाग में गांठ है। इसके बाद दिल्ली के शांति मुकुंद अस्पताल में भर्ती करने के लिए कोरोना जांच नोएडा के अस्पताल से कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बाद में उसे 11 जुलाई को ग्रेटर नोएडा एक कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया। 

शुक्रवार की सुबह मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि अस्पताल ने हृदय गति रुकने से मौत की जानकारी दी गई, लेकिन शव ले जाने से मना कर दिया गया। इस पर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। मामला बिगड़ने पर अस्पताल प्रशासन की ओर से दो कर्मियों की मौजूदगी में गांव में अंतिम संस्कार कराया गया है।

राम अवतार के परिजनों का कहना है कि एक और कोविड-19 अस्पताल के अधिकारी यह कह रहे हैं कि उन्हें कोरोना वायरस था। दूसरी ओर शव देने से इंकार कर रहे हैं। जब राम अवतार को कोरोना वायरस नहीं था तो शव देने में परेशानी क्या है? परिजनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में संक्रमित लोग सामने आने के बावजूद कोरोना से जुड़े आंकड़ों में हेराफेरी चल रही है।

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