दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण के कारण दम घुट रहा है, देश के बाकी महानगरों का हाल क्या है, जानिए

Tricity Today | Pollution in Delhi-NCR



Pollution in Delhi-NCR : दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region) का पिछले करीब 10 दिनों से वायु प्रदूषण के कारण दम घुट रहा है। आलम यह है कि दिल्ली से कहीं ज्यादा प्रदूषित इसके चारों ओर के शहर हैं। प्रदूषण का कारण क्या है? इसे लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Prakash Javdekar से और दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal बहस कर चुके हैं। पूरे Delhi-NCR में प्रदूषण की रोकथाम के लिए व्यापक उपाय किए जा रहे हैं। निर्माण बंद कर दिए गए हैं। Central Pollution Control Board ने डीजल जनरेटर सेट चलाने पर पाबंदी लगा दी गई है। कूड़ा कचरा जलाने से लेकर सड़कों पर झाड़ू लगाने तक की मनाई है। इसके बावजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 तक पहुंच चुका है। दूसरी ओर देश के बाकी महानगरों का क्या हाल है? आइए जानने की कोशिश करते हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने रविवार की शाम 4:00 बजे पिछले चौबीस घंटों के औसत वायु प्रदूषण का आंकड़ा जारी किया। जिसमें देशभर के 108 शहरों को शामिल किया गया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली और आसपास सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में तमाम शहरों का बुरा हाल है। रविवार को छुट्टी होने के कारण सड़कों पर वाहन बहुत कम थे। इंडस्ट्री भी बंद थी। इसके बावजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 तक पहुंच गया था। इससे पहले कामकाजी दिनों में एक्यूआई 350 तक रहा। मतलब, हवा बहुत खराब श्रेणी में थी। जिसमें नियमित रूप से सांस लेने के कारण फेफड़ों और सांस से जुड़ी तमाम बीमारियां हो सकती हैं। लेकिन यहां रह रहे लोग यहां रहने के लिए मजबूर हैं। जाएं तो कहां जाएं?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी देश के दूसरे महानगरों की बात करते हैं। सबसे पहले आर्थिक राजधानी मुंबई को देखिए। वहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 82 दर्ज किया गया। मतलब, यह स्थिति संतोषजनक है। मुंबई जैसे महानगर के लिए इसे बढ़ा हुआ प्रदूषण नहीं माना जा सकता है। कोलकाता में थोड़ा प्रदूषण दर्ज किया गया है। वहां का एएक्यूआई रविवार की शाम 4:00 बजे तक 120 दर्ज किया गया। इसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सामान्य श्रेणी में रखता है। हालांकि, अस्थमा, हृदयाघात और फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए प्रदूषण का यह स्तर भी नुकसानदायक माना जाता है। चेन्नई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 62 रिपोर्ट किया गया है। यह संतोषजनक स्थिति में है। मतलब, मुंबई और चेन्नई वहां के रहने वालों के लिए पर्यावरण की दृष्टि से अच्छे शहर हैं। कोलकाता मामूली सा कष्टदायक है।

जानकारों का कहना है कि दिल्ली के अलावा देश के बाकी तीनों महानगर मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समुद्र तट के किनारों पर बसे हुए हैं। ऐसे में शहर के प्रदूषण को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। इन तीनों महानगरों में पैदा होने वाला प्रदूषण समंदर की ओर चला जाता है। जिससे शहर का वेंटीलेशन बेहतर बना रहता है। अब देश के कुछ ऐसे शहरों जो महानगरों की श्रेणी में ही शामिल है और समुद्र के किनारे नहीं हैं, उन पर भी नजर दौड़ा लेते हैं। बेंगलुरु औद्योगिक शहर है। वहां का ट्रैफिक सिस्टम दिल्ली-एनसीआर से भी ज्यादा खराब माना जाता है। रविवार की शाम 4:00 बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान बेंगलुरु का एक्यूआई 72 दर्ज किया गया है। यह है संतोषजनक श्रेणी में माना जाता है। चंडीगढ़ ट्राइसिटी, जिसमें पंचकूला और मोहाली भी शामिल हैं, इन शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक 112 है।

गुजरात के गांधीनगर शहर का एक्यूआई 49, अहमदाबाद का 150, जयपुर में 154, पटना में 161, भोपाल में 115 है। लखनऊ में एक्यूआई 246, हैदराबाद में 48, इंदौर में 91 और जबलपुर में 63 है। मतलब साफ है कि पूरे देश में सबसे बुरा हाल दिल्ली एनसीआर रीजन का ही है। मौसम विज्ञान केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि सोमवार की शाम से पूरे दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता और ज्यादा खराब हो सकती है। दरअसल, उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना है। जिसकी वजह से पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों से लेकर हरियाणा और पंजाब में जलाई जा रही पराली का धुआं इस तरफ आ सकता है।

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