गाजियाबाद जिलाधिकारी डॉ. अजय शंकर पांडेय ने अपनी ही कार्यालय का निरीक्षण किया, डीएम के अंदाज को देखकर मचा तहलका

Tricity Today | गाजियाबाद जिलाधिकारी डॉ. अजय शंकर पांडेय



गाजियाबाद सरकारी कार्यालय में पानी की बर्बादी, बिजली का दुरूपयोग को लेकर जिलाधिकारी द्वारा की हर बार एक नई मुहिम से जहां कार्यालय में इन सब पर रोक लगेगी। वही इन सबका कब, कैसे उपयोग करना है इसका पाठ भी जिलाधिकारी ने अधिकारियों को अपने अंदाज में गुरूवार को पाठ पढाया। 

बुधवार को जिलाधिकारी ने न केवल अपने कार्यालय में एक घंटे तक बिजली के बिना काम किया, बल्कि पूरे एक घंटे तक कलेक्ट्रेट परिसर की बिजली भी कटवा दी। असल में जिलाधिकारी ने यह सब एक अभियान के तहत किया। जिले के विभिन्न विभागों में औचक निरीक्षण कर रहे जिलाधिकारी अजय पांडेय जहां भी कमी पाते हैं उसे न केवल दुरुस्त करते हैं। बल्कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रायश्चित करने को भी कहते हैं। 

इस समय वह बिजली की बचत को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को साफ- साफ कह रखा है कि कोई बिजली को वेबजह खर्च न करे। यह नियम उन्होंने अपने कार्यालय पर भी लागू कर रखा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने कार्यालय से जाएगा। तो उसे हर हाल में बिजली के स्विच आफ करने होंगे। 

गुरूवार को जिलाधिकारी जब अपने कार्यालय में पहुंचे तो उनके कार्यालय के सारे पंखे और एसी चल रहे थे। कई विभागों में कर्मचारी नहीं थे, लेकिन वहां भी एसी और पंखे चल रहे थे। जिलाधिकारी ने वहां मौजूद आफिस अटेंडेंट से पूछा तो उन्होंने कहा कि 15 मिनट पहले ही पंखे और एसी चलाए हैंं। 

बस फिर क्या, जिलाधिकारी कार्यालय का मुखिया होने के नाते उन्होंने सबसे पहले अपने कार्यालय के सभी पंखे बंद कराए और उसके बाद पूरे कलेक्ट्रेट परिसर की लाइट बंद करा दी। जिलाधिकारी ने लगभग एक घंटे तक गर्मी में बैठकर फरियादियों की शिकायतें सुनीं। 

इस दौरान वहां आने वाले फरियादी एक ओर जहां उनकी सख्ती की सराहना कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर डीएम के अनोखे प्रायश्चित की चर्चा भी। इतना ही नहीं, उनके आने से पूर्व उनके खुद के कक्ष की भी बिजली ऑन देखकर उन्होंने इसकी बर्बादी का खुद को दोषी मानते हुए खुद को ही सज़ा भी दी और इसके लिए आज दिन भर अपने कक्ष के लाइट, पंखे, एसी बंद कर काम काज किया। 

इतना ही नहीं उन्होंने अन्य एडीएम व सिटी मजिस्ट्रेट तक को कक्षों की लाइट बंद कराकर काम कराया। डीएम ने आज जिला मुख्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान जहां अधिकतर अधिकारी व कर्मचारी समय से कार्यालय नहीं पहुंच सके तो वहीं बिजली की बर्बादी पर उन्होंने नाराजग़ी जताई। इतना ही नहीं डीएम ने खुद कई खाली कमरों में चल रहे पंखे, लाइट आदि को बंद किया। डीएम के इस औचक निरीक्षण से अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। 

सीएम के निर्देशानुसार साढ़े नौ बजे अधिकारियों का अपने कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य है, लेकिन डीएम के औचक निरीक्षण में अधिकतर अधिकारी अपने कार्यालय में सुबह दस बजे तक भी नहीं पहुंच पाए। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में बाबु अपने पटल पर नहीं मिले। डीएम ने थर्ड फ्लोर तक कार्यालयों का निरीक्षण किया। थर्ड फ्लोर पर बने खनन विभाग, कारखाना निदेशक कार्यालय में अधिकारी सहित सभी कर्मचारी गायब थे। विभाग खाली होने के बाद भी वहां पंखे और लाइटें जल रही थीं। जिस पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने खुद से विभाग की लाइन बंद की। दूसरे फ्लोर पर भी अधिकतर कार्यालय खाली मिले। तो वहीं समय निर्धारित होने के बाद भी एडीएम, एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट तक भी समय से अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। डीएम ने प्रत्येक विभाग का निरीक्षण किया। 

डीएम के इस औचक निरीक्षण की खबर मिलने से अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। डीएम ने बताया कि उनके आने से पूर्व ही उनके कक्ष के भी एसी और लाइट चला दिए गए थे जिससे काफी देर तक बेवजह बिजली चलती रही। ऐसे में उनके आने से पूर्व जितनी देर भी कमरे की लाइट बंद रही, उतनी देर तक लाइट बंद कर उन्होंने काम काज किया गया ताकि बिजली की बर्बादी रोकी जा सकें।

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