Google Image | एम्स के डायरेक्टर ने कहा कोरोना के बाद हो रहे फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के चलते ज्यादा मौतें
देश में एक तरफ कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ाता जा रहा है तो वहीं कोरोना वैक्सीन की कमी भी लगातार बनी हुई है। ऐसे में कोरोना कम होने का नाम नही ले रहा है।एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया और मेदांता अस्पताल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन ने कोरोना संक्रमण और वैक्सीन को लेकर आज शनिवार को चर्चा की है। इस चर्चा में गुलेरिया ने कहा है कि देश में कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के मामले बढ़े हैं। इसको लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों में इंफेक्शन रोकने के लिए प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। यह देखा जा रहा है कि सेंकेंडरी इंफेक्शन, फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन ज्यादा मृत्यु दर का कारण बन रहे हैं।
ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस मिट्टी, हवा और यहां तक कि भोजन में भी पाए जाते हैं। लेकिन ये आमतौर पर संक्रमण का कारण नहीं बनते हैं। कोरोना से पहले इस संक्रमण के बहुत कम मामले थे। अब कोरोना के चलते बड़ी संख्या में इसके मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि एम्स में इस फंगल इंफेक्शन के 23 मरीजों का इलाज चल रहा है। उनमें से 20 मरीज कोरोना पॉजिटिव हैं।और बाकी तीन को कोरोना नहीं है। वहीं अलग-अलग राज्यों में 500 से ज्यादा मामले ब्लैक फंगस के मिले हैं।चेहरे, नाक, आंख को और मस्तिष्क को इफ़ेक्ट कर सकता है। जिससे आंख कमजोर हो सकती है या रोशनी भी जा सकती है।वहीं ये यह फेफड़ों में भी फैलता है।
और दूसरी बात उन्होने कहा है कि कई लोगो को अब भी टीका नहीं मिल पा रहा है। लेकिन उम्मीद है कि अगले दो महीने में देश में वैक्सीन की कमी नहीं रहेगी। दो महीने में बड़ी संख्या में वैक्सीन उपलब्ध होगी। क्योंकि वैक्सीन उत्पादक कंपनियां अपने उत्पादन प्लांट खोलना शुरू कर देंगी और बाहर से भी हमें वैक्सीन मिलेगी।जो कंपनियां वैक्सीन बना रही हैं। वे और मैनुफैक्चरिंग प्लांट खोलना शुरू करेंगी तो और डोज उपलब्ध होंगी। कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक के भारत में और मैनुफैक्चरिंग प्लांट बढ़ाए जा रहे हैं।
भारत में उत्पादन के लिए कई कंपनियों से टाईअप किया जा रहा है। भारत बायोटेक और सीरम इंस्टिट्यूट भी नए प्लांट सेटअप कर रहे हैं। जुलाई-अगस्त तक हमारे पास बड़ी संख्या में डोज उपलब्ध हो जाएंगी। डॉ गुलेरिया ने कहा कि हम एक दो दिन या महीने भर में सबको वैक्सीनेट नहीं कर पाएंगे। ऐसी स्थिति में हम इस तरह से अपॉइंटमेंट देने की रणनीति बनानी चाहिए हमें अपनी आबादी को वैक्सीनेट करने की तरफ देखना होगा।
और डॉ. नरेश त्रेहन ने वैक्सीन को लेकर कहा कि आज वैक्सीन के लिए पैनिक करना उचित नहीं है। मेरा विचार है कि जहां कोरोना के हॉटस्पॉट हैं वहां 6 हफ़्ते में वैक्सीन लगनी चाहिए लेकिन जहां केस कम हो रहे है। वहां डोज के बीच का समय बढ़ाया जा सकता है। भारत के पास वो इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है कि अगर डोज उपलब्ध हों तो वह जल्द से जल्द सबको टीका लगा सकता है।
कोरोना से बचने के लिए हमें खुद ही पर्सनल लॉकडाउन में जाना है। कोरोना के लक्षण दिखाई दें तो फोरन खुद को आइसोलेट कर लें। ताकि बाकी लोगों को वायरस से बचाया जा सके। अगर कोविड के प्रति सावधानियां रखेंगे तो वैसे ही संक्रमण की चेन टूट जाएगी। अपने खाने पीने पर ध्यान दे जितना हो सके अपने इम्युनिटी को बढ़ाये ज्यादा जरूरी हो तभी घर से निकले यहाँ आप खुद ही बदलाव देखेगें।