Jewar Airport से जुड़ी बड़ी खबर, 15 अक्टूबर से पहले मिल सकती है खुशखबरी

Google Image | जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी बड़ी खबर



Noida International Airport जेवर की विकासकर्ता कंपनी Zurich International Airport एजी और नोएडा इंटरनलेशन एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) के बीच 15 अक्टूबर से पहले अनुबंध (कंसेसन एग्रीमेंट) होना है। कोरोना महामारी के चलते इंटरनेशनल फ्लाइट बंद होने से कंपनी के प्रतिनिधि नहीं आ पा रहे हैं। अब नियाल ने अनुबंध करने के लिए कई विकल्प दिए हैं। ताकि समय काम हो सके। अनुबंध के बाद ही एयरपोर्ट का काम शुरू हो सकेगा।

जेवर एयरपोर्ट के विकास के लिए स्विस कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी का चयन हुआ है। अनुबंध छोड़कर सारी प्रक्रिया हो गई है। कोरोना महामारी के चलते यह अनुबंध नहीं हो पाया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने से कंपनी के प्रतिनिधि भारत नहीं आ पा रहे हैं। इसके चलते अनुबंध नहीं हो पा रहा है। नियाल ने अनुबंध के लिए दूसरी बार तिथि बढ़ाई है। पहले 17 अगस्त तक का समय दिया गया था। लेकिन कोरोना के चलते कंपनी के प्रतिनिधि भारत नहीं आ पाए। अब 15 अक्टूबर तक अनुबंध किया जाना है। नियाल ने इसके लिए कई विकल्प दिए हैं ताकि अनुबंध किया जा सके।

ये विकल्प दिए गए
नियाल ने कहा कि जिस देश के लिए फ्लाइट चल रही हों, दोनों तरह के प्रतिनिधि वहां पर पहुंच जाएं। वहां पर अनुबंध पर दस्तखत किए जा सकते हैं। अगर वे चार्टर्र प्लेन से आना चाहते हैं तो इसकी केंद्र सरकार से अनुमति दिलाएंगे। नियाल का प्रयास है कि जल्द से जल्द अनुबंध किया जाए ताकि परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके। 15 अक्टूबर से पहले अगर अंतरराष्ट्रीय उड़ाने शुरू होती हैं तो स्विस कंपनी के अफसर आसानी से आ सकेंगे।

मिट‘टी की जांच के लिए नमूने लिए जा रहे
जेवर एयरपोर्ट की साइट पर दो तरह का सर्वे चल रहा है। ड्रोन से सर्वे किया जा रहा है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि एयरपोर्ट की जमीन पर क्या-क्या निर्माण कार्य हैं। एयरपोर्ट जमीन के चारों ओर पिलर लगाए जा चुके हैं। कहीं-कहीं पर तारबंदी भी हुई है। अतिक्रमण को रोकने के लिए पूर्व सैनिकों को तैनात किया गया है। इसके अलावा एक और सर्वे हो रहा है। मिट‘टी की जांच के लिए नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। ताकि मिट‘टी के स्ट्रक्चर का पता लग सके। मिट‘टी के अनुरूप ही वहां पर निर्माण कार्य किया जाएगा।

1334 हेक्टेयर जमीन पर बनेगी परियोजना
जेवर एयरपोर्ट का पहला चरण 1334 हेक्टेयर जमीन पर पूरा होगा। जिला प्रशासन ने अधिग्रहण के बाद जमीन को यमुना प्राधिकरण को सौंप दिया है। प्राधिकरण ने इसके चारों ओर पिलर लगाए हैं। यह जमीन छह गांवों की हैं। इस परियोजना में आने वाले परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। जेवर बांगर के पास सबको बसाया जाएगा। यहां पर 49 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण अंतिम चरण में है। यह परियोजना करीब 30 हजार करोड़ रुपये की है।

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