Jewar Airport का ठेका हासिल करने वाली कम्पनी को दो विकल्प दिए, कोरोना फ्री मुल्क में होगा करार या...

Google Image | प्रतीकात्मक फोटो



Noida International Airport का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। विश्वव्यापी कोरोना महामारी के कारण एयरपोर्ट का ठेका हासिल करने वाली कम्पनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी के अफसर भारत नहीं आ पा रहे हैं। जिससे इस कम्पनी और नोएडा इंटरनलेशन एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) के बीच एग्रीमेंट नहीं हो पा रहा है। अब 15 अक्टूबर से पहले यह अनुबंध (कंसेसन एग्रीमेंट) होना है। अब कम्पनी को नियाल ने दो विकल्प दिए हैं। अफसर स्विटजरलैंड से प्राइवेट जेट से आ जाएं या कोरोना फ्री मुल्क में दोनों पक्ष जाकर एग्रीमेंट कर लें।

कोरोना महामारी के चलते इंटरनेशनल फ्लाइट बंद होने से कंपनी के प्रतिनिधि नहीं आ पा रहे हैं। अब नियाल ने अनुबंध करने के लिए कम्पनी विकल्प दिए हैं, ताकि समय काम शुरू हो सके। अनुबंध के बाद ही एयरपोर्ट का काम शुरू हो सकेगा।

जेवर एयरपोर्ट के विकास के लिए स्विस कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी का चयन हुआ है। अनुबंध छोड़कर सारी प्रक्रिया हो गई है। कोरोना महामारी के चलते यह अनुबंध नहीं हो पाया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने से कंपनी के प्रतिनिधि भारत नहीं आ पा रहे हैं। नियाल ने अनुबंध के लिए दूसरी बार तारीख बढ़ाई है। पहले 17 अगस्त तक का समय दिया गया था लेकिन कोरोना के चलते कंपनी के प्रतिनिधि भारत नहीं आ पाए। अब 15 अक्टूबर तक अनुबंध किया जाना है। नियाल ने इसके लिए कई विकल्प दिए हैं ताकि अनुबंध किया जा सके।

कम्पनी को यह दो विकल्प दिए गए हैं: नियाल ने कहा कि जिस देश के लिए फ्लाइट चल रही हों, दोनों तरफ के प्रतिनिधि वहां पर पहुंच जाएं। वहां अनुबंध पर दस्तखत किए जा सकते हैं। दूसरा विकल्प है कि अगर कम्पनी के जिम्मेदार अफसर चार्टर्र प्लेन से आना चाहते हैं तो इसकी केंद्र सरकार से अनुमति दिलाई जाएगी। नियाल का प्रयास है कि जल्द से जल्द अनुबंध किया जाए, ताकि परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके। 15 अक्टूबर से पहले अगर अंतरराष्ट्रीय उड़ाने शुरू होती हैं तो स्विस कंपनी के अफसर आसानी से आ सकेंगे।

एयरपोर्ट की जमीन से मिट्टी की जांच के लिए नमूने लिए जा रहे हैं: जेवर एयरपोर्ट की साइट पर दो तरह का सर्वे चल रहा है। ड्रोन से सर्वे किया जा रहा है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि एयरपोर्ट की जमीन पर क्या-क्या निर्माण कार्य हैं। एयरपोर्ट की जमीन के चारों ओर पिलर लगाए जा चुके हैं। कहीं-कहीं पर तारबंदी भी हुई है। अतिक्रमण को रोकने के लिए पूर्व सैनिकों को तैनात किया गया है। इसके अलावा एक और सर्वे हो रहा है। मिट्टी की जांच के लिए नमूने एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि मिट्टी के स्ट्रक्चर का पता लग सके। मिट्टी के अनुरूप ही वहां निर्माण किया जाएगा।

1334 हेक्टेयर जमीन पर बनेगी परियोजना

जेवर एयरपोर्ट का पहला चरण 1334 हेक्टेयर जमीन पर पूरा होगा। जिला प्रशासन ने अधिग्रहण के बाद जमीन को यमुना प्राधिकरण को सौंप दिया है। प्राधिकरण ने इसके चारों ओर पिलर लगाए हैं। यह जमीन छह गांवों की हैं। इस परियोजना में आने वाले परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। जेवर बांगर के पास सबको बसाया जाएगा। यहां पर 49 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण अंतिम चरण में है। यह परियोजना करीब 30 हजार करोड़ रुपये की है।

अन्य खबरें