विश्लेषण : जेवर, जहांगीरपुर और बिलासपुर में भाजपा को करारी शिकस्त, दनकौर में बमुश्किल जीत मिली, ये हैं वजह

नोएडा | 1 साल पहले | Pankaj Parashar

Tricity Today | गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ.महेश शर्मा



Noida News : शनिवार को उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव का परिणाम आ गया। पूरे राज्य में भाजपा के लिए आशातीत परिणाम आए हैं, लेकिन गौतमबुद्ध नगर में हालात जुदा हैं। जिले में जेवर, जहांगीरपुर और बिलासपुर नगर पंचायतों में भाजपा को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। जहांगीरपुर में पार्टी का उम्मीदवार चौथे नंबर पर रहा है। जेवर के प्रत्याशी तीसरे और बिलासपुर में दूसरे स्थान पर उम्मीदवार रहे हैं। दनकौर में भारतीय जनता पार्टी के छक्के छूट गए। बमुश्किल मामूली अंतर से पार्टी ने कामयाबी हासिल की है। भाजपा को दादरी नगर पालिका से जरूर सुकून देने वाली खबर मिली है। पर, यह कामयाबी हासिल करने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सबकुछ अपनाना पड़ गया। भाजपा के लिए इस चुनाव की बोहनी बढ़िया हुई थी। रबूपुरा नगर पंचायत में चेयरमैन से लेकर सभी 12 सभासद भाजपा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे, लेकिन इसे जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह की व्यक्तिगत उपलब्धि माना जा रहा है।

बहुत बड़ा है जिले में भाजपा का लाव लश्कर
गौतमबुद्ध नगर में भारतीय जनता पार्टी के पास लाव-लश्कर की कोई कमी नहीं है। डॉ.महेश शर्मा दो बार के सांसद हैं। सुरेंद्र सिंह नागर राज्यसभा के सांसद हैं। नोएडा, दादरी और जेवर से भाजपा के विधायक हैं। दो विधान परिषद सदस्य नरेंद्र भाटी और श्रीचंद शर्मा हैं। भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सतेंद्र सिसोदिया गौतमबुद्ध नगर से हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा में दो उपाध्यक्ष पंकज सिंह और सुरेंद्र सिंह हैं। जिला पंचायत के अध्यक्ष अमित चौधरी हैं। इनके अलावा करीब एक दर्जन नेता भाजपा में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर छोटे-बड़े पद लेकर बैठे हैं। इन सबके बावजूद निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा के छक्के छुड़ा दिए। आखिर ऐसा कैसे हो गया? इसकी कुछ खास वजह हैं। आइए हम आपको बताते हैं।

1. सांसद डॉ.महेश शर्मा का मनमाना रवैया : इस करारी हार के पीछे सबसे बड़ी वजह गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ.महेश शर्मा का मनमाना रवैया है। सांसद के बारे में एक आम धारणा है कि उन्हें पार्टी में बूथ अध्यक्ष से लेकर जिला अध्यक्ष तक केवल अपनी पॉकेट का आदमी चाहिए। इसी तरह हर छोटे-बड़े चुनाव में वह अपनी पसंद का उम्मीदवार खड़ा करते हैं। गौतमबुद्ध नगर में दादरी नगर पालिका और पांच नगर पंचायत दनकौर, बिलासपुर, जेवर, जहांगीरपुर और रबूपुरा हैं। खास बात यह है कि पांचों नगर पंचायतें जेवर विधानसभा क्षेत्र में हैं। जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह से सांसद डॉ.महेश शर्मा के रिश्ते जगजाहिर हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों के बीच का गतिरोध खुलकर सामने आ गया था। ऐसे में विधायक को हासिए पर खड़ा करने के लिए सांसद ने अपनी मर्जी के उम्मीदवार चुने। पूरे चुनाव में चर्चा रही कि सांसद ने योग्यता तय की थी कि विधायक को ज्यादा से ज्यादा बुरा बताने वालों को टिकट मिलेगा। ऐसे उम्मीदवारों के लिए विधायक प्रचार करने नहीं गए। अब परिणाम सामने हैं। चारों नगर निकायों में पार्टी उम्मीदवारों की हालत बद से बदतर हो गई।

2. जिले में भाजपा संगठन की खस्ता हालत : गौतमबुद्ध नगर भारतीय जनता पार्टी की कमान विजय भाटी के हाथों में है। वह पिछले 12 वर्षों से पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे हैं। पहले लगातार छह साल जिला महामंत्री रहे और अब 6 साल से जिलाध्यक्ष हैं। इसके बावजूद पार्टी खस्ताहाल है। जानकारों का कहना है, "विजय भाटी का एक ही मकसद रहा है। वह किसी भी तरह अपनी कुर्सी को सलामत रखना चाहते हैं। संगठन में अनुशासनहीनता, गुटबंदी और खींचतान चरम पर है। सांसद शिविर से आने वाले फैसलों पर आंख मूंदकर मुहर लगाने की आदत है। संगठन में तेरा-मेरा, अपना-पराया और दोस्त-दुश्मन के आधार पर नियुक्तियां की गई हैं। जिसकी वजह से काबिल लोग उपेक्षित हैं। सिफारिश के आधार पर नाकाबिल, निष्क्रिय और चापलूस संगठन पर हावी हैं। जिस भारतीय जनता पार्टी में चुनाव पन्ना प्रमुख के आधार पर लड़ा जाता है, उसके संगठन को निर्दलीय उम्मीदवारों ने पटखनी दी है।" इन चुनावों पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि संगठन पूरी तरह चुनाव से दूरी बनाकर बैठा रहा। जिन लोगों को चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी बनाकर भेजा गया और दूसरे दायित्व दिए गए थे, उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। टिकट देने के मुद्दे पर संगठन की एक नहीं चली। कोर कमेटी की बैठकों में एकतरफा फैसले लिए गए। जिसकी वजह से पार्टी पब्लिक के सामने अच्छे उम्मीदवार पेश नहीं कर पाई। ऐसे में वोटर ने निर्दलियों को पसंद किया है।

3. बागियों ने पार्टी को बर्बाद किया : लंबे अरसे से भारतीय जनता पार्टी में काम कर रहे लोगों को दरकिनार किया गया। टिकट बांटते वक्त उनके दावों पर विचार नहीं किया गया। सिफारिश के आधार पर अपने मनपसंद लोगों को टिकट दिए गए। जिससे पार्टी के पुराने वफादार मजबूर होकर बागी बन गए। दादरी, जेवर और जहांगीरपुर इसके सबसे बड़े उदाहरण बने हैं। दादरी में गीता पंडित के खिलाफ पुराने भाजपाई जगभूषण ने ताल ठोंक दी। सांसद, विधायक, क्षेत्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष उसे मनाने में असफल रहे। आखिर में जगभूषण गर्ग से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में  समर्थन मांगा। अगर जगभूषण गर्ग को सीएम के पास नहीं ले जाया जाता तो दादरी के परिणाम भी जेवर जैसे होते। जेवर में भाजपा के कई पुराने नेताओं ने चुनाव से किनारा कर लिया। धर्मेंद्र अग्रवाल के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार नारायण माहेश्वरी को खुलकर समर्थन किया। जहांगीरपुर में तो भाजपा की गुटबंदी ने संगठन को शर्मसार किया। पार्टी ने जयप्रकाश शर्मा को टिकट दिया। सांसद के बेहद करीबी माने जाने वाले मूलचंद शर्मा ने बगावत कर दी। वह सांसद के कहने पर भी मैदान से नहीं हटे। पार्टी उम्मीदवार चौथे नंबर पर चला गया।

4. ब्राह्मण समाज में ही सांसद का विरोध : भाजपा की दुर्गति के लिए सबसे बड़ा कारण ब्राह्मण समाज की बेरुखी रही है। दादरी में जगभूषण गर्ग के मैदान छोड़ने से भले गीता पंडित जीत गईं लेकिन ब्राह्मण समाज बंट गया। जिसका खराब संदेश गया है। जेवर में ब्राह्मण समाज ने खुलकर भाजपा प्रत्याशी का विरोध किया। सांसद को तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। जेवर रहने वाले अनिल कुमार शर्मा कहते हैं, "नारायण माहेश्वरी कारोबारी हैं। पहले ईंट भट्टे का संचालन करते थे। तीन बेटे हैं। पहली बार चुनाव लड़ा और जीता है। समाज सेवा करते हैं। धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। भाजपा ने टिकट चयन ठीक नहीं किया। धर्मेंद्र अग्रवाल ने घोघरी माता मंदिर पर विवाद किया। उन पर ब्राह्मण समाज पर गोली चलाने का आरोप लगा। धर्मेंद्र अग्रवाल जेवर नगर पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं। उस वक्त उन्होंने दाऊजी के मंदिर परिसर में सफाई नहीं होने दी थी। इन कारणों से ब्राह्मण समाज ने खुलकर विरोध किया। संघ-भाजपा के पुराने कार्यकर्ता नीरज गोयल को पार्टी ने नजरअंदाज किया। इससे वैश्य समाज साथ नहीं आया। धर्मेंद्र के सहयोगियों पर निचले तबके की जमीनों पर कब्जे करने के आरोप हैं। लिहाजा, वहां भी विरोध हुआ।"

रन्हेरा कॉलेज पूर्व प्रधानध्यापक केके शर्मा ने कहा, "ब्राह्मण समाज के लोग इकट्ठा होकर सांसद महेश शर्मा के पास गए थे। उनसे हमने किसी ब्राह्मण को चुनाव लड़ाने की मांग की थी। उन्होंने जवाब दिया कि वैश्य समाज से किसी को चुनाव लड़ाएंगे। जब हमने धर्मेंद्र अग्रवाल के नाम पर असहमति जाहिर की तो उन्होंने कहा कि तुम लोगों को निमंत्रण भेजकर सलाह लेने नहीं बुलाया है। मुझे जेवर क्षेत्र से कोई अपेक्षा भी नहीं है।" केके शर्मा आगे कहते हैं कि सांसद ने पूरे समाज को अपमानित किया। उन्होंने समाज को अपमानित करने वाले को टिकट दिया। अब परिणाम सबके सामने हैं।

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