शिक्षा में फर्जीवाड़ा: गौतमबुद्ध नगर में तीन शिक्षिकाओं के दस्तावेज फर्जी पाए गए, निलंबित कर कार्रवाई शुरू हुई

Google Image | तीन शिक्षिकाओं पर कार्रवाई हुई



गौतमबुद्ध नगर जिले में फर्जी कागजातों के आधार पर नौकरी कर रही तीन महिला शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। उनके खिलाफ दनकौर और जेवर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। तीनों के पास डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की फर्जी डिग्री थी। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश सरकार फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। ज्यादातर मामलों में आरोपियों से वेतन के तौर पर हुए भूगतान की वसूली भी की जा रही है। दनकौर ब्लॉक क्षेत्र में नियुक्त दो प्राइमरी शिक्षिकाओं का शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में शनिवार को दोनों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। दोनों के खिलाफ दनकौर कोतवाली में फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज कराया गया है।  शासन के निर्देश पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दनकौर कोतवाली के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिंह पवार ने 2 शिक्षिकाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।  ये शिक्षिकाएं क्षेत्र के भट्टा गांव के प्राइमरी स्कूल में नियुक्त आशा कुमारी और चचूला गांव में नियुक्त सुषमा रानी हैं। दोनों शिक्षिकाएं फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर कई वर्षों से नौकरी कर रही थीं।
      
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नियुक्त एसआईटी सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। एसआईटी की जांच में दोनों के कागजात फर्जी पाए गए हैं। दोनों शिक्षिकाओं ने डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की फर्जी डिग्रियां लगाई थीं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश स्तर पर शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच कराई जा रही है। इसमें गौतमबुद्ध नगर जिले की चार शिक्षिकाओं के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं।

गत दिनों दादरी में भी एक शिक्षिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। शनिवार को जेवर में भी एबीएसए सुनील दत्त मुद्गल ने एक शिक्षिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। सभी आरोपी शिक्षिकाओं पर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी कर नौकरी पाने का आरोप है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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