Big News: ग्रेटर नोएडा में हुआ 20 हजार करोड़ रुपये का घोटाला, सीएजी ने किया खुलासा

Tricity Today | प्रतीकात्मक फोटो



नोएडा की तरह ग्रेटर नोएडा में भी बड़ा घोटाला सामने आया है। महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। इससे पहले नोएडा में सीएजी करीब 30 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा कर चुका है। जिसकी जानकारी खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा में दी थी। अब ग्रेटर नोएडा में बड़ा खुलासा सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है।

सीएजी रिपोर्ट में नोएडा की तरह ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में भी जमीन आवंटन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई हैं। जिनके जरिए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण को 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया गया है। सीएजी की ओर से शासन और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में प्रारम्भिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल की गई हैं। सीएजी ने अपनी आपत्तियों पर विकास प्राधिकरण से जवाब मांगे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की जमीन खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी होने की बात सामने आई है। ऑडिट टीम की रिपोर्ट पर अब प्राधिकरण जवाब तैयार कर रहा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार वर्ष 2008 से 2017 के बीच जिले के तीनों विकास प्राधिकरणों में हुए घोटालों की जांच सीएजी से करवा रही है। इससे पहले नोएडा प्राधिकरण की सीएजी रिपोर्ट में 30 हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आ चुकी है। जिसके बारे में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले सदन को जानकारी दी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में दो दिनों के दौरे के दौरान भी मुख्यमंत्री ने बताया था।

गौरतलब है कि इस दौरान उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की सरकार थीं। जिन्हें मौजूदा सरकार इन ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर राजनीतिक मोर्चे पर घेर रही हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधानसभा में आश्वासन दे चुके हैं कि इन घोटालों के लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाही की जाएगी। सूत्रों से जानकारी यह भी मिली है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में अधिकारियों की एक टीम को इन ऑडिट रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। जिम्मेदार अफसरों की पहचान और एक्शन तय कर रही है।

इन चार तरह से विकास प्राधिकरण को पहुंचाया गया नुकसान

  1. विकास प्राधिकरण की नीतियों में बदलाव किया गया। इसमें खासतौर से आर्थिक मंदी का हवाला देकर भूमि आवंटन नीति और भुगतान नीति में बदलाव किया गया है। खराब आवंटन नीति की बदौलत चहेतों की एक-एक महीने पुरानी कम्पनियों को अरबों रुपये की जमीन आवंटित की गई हैं।
  2. जमीनों की कीमतों के निर्धारण में धांधली की गई है। कोड़ियों के भाव में कीमती जमीन का आवंटन किया गया है। बोगस बिडिंग सिस्टम डेवलप किया गया। प्राधिकरण बोर्ड के जरिए भूमि उपयोग परिवर्तन को इसका जरिया बनाया गया। बोर्ड के फैसलों में मनमानी की गई हैं।
  3. सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। मुकदमों की फीस, टेंडरों की कीमत का गलत निर्धारण किया गया और टेंडर अयोग्य कम्पनियों को दिए गए हैं। डिफॉल्टर कम्पनियों को करोड़ों-अरबों रुपये का भुगतान किया गया है। एक ही काम को बार-बार करवाया गया है।
  4. नियुक्तियों और सेवाओं में व्यापक गड़बड़ियां की गई हैं। तमाम ऐसे लोगों को काम दिए गए हैं, जो नाकाबिल हैं। गैर अनुभवी एजेंसियों को काम दिए गए हैं। ब्लैक लिस्टेड ठेकेदारों ने लूट मचाई है। प्राधिकरण से सीधे खर्चों में भी धांधली मिली हैं।

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