नोएडा: बतौर ओलंपियन खुद को सफल मानते हैं या डीएम! जानें क्या बोले जिलाधिकारी सुहाल एलवाई

नोएडा | 3 साल पहले |

Tricity Today | एयरपोर्ट पर डीएम सुहास एलवाई का हुआ स्वागत



Noida News: गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास एलवाई (DM Suhas LY IAS) देश के पहले आईएएस अधिकारी बन गए हैं, जिन्होंने पैरालंपिक खेलों में सिल्वर मेडल जीता है। बीते सोमवार को वह जापान की राजधानी टोक्यो (Tokyo Paralympics-2020) से वापस लौटे। इस मौके पर राजधानी दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नोएडा तक उनका जोरदार स्वागत हुआ। डीएनडी उनकी अगवानी के लिए सजा रहा। सुहास 2007 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अफसर हैं। वह आजमगढ़, प्रयागराज और दूसरे जिलों में बतौर जिलाधिकारी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। फिलहाल वह नोएडा के डीएम हैं। 

उनकी वापसी के बाद एक निजी टीवी चैनल ने सुहास और उनकी पत्नी ऋतु सुहास से बात की। इस दौरान उन्होंने कई बिंदुओं पर बेबाकी से जवाब दिया। इसी कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया कि वह बतौर जिलाधिकारी खुद को ज्यादा कामयाब मानते हैं, या एक ओलंपियन के तौर पर खुद को सफल मानते हैं। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, एक खिलाड़ी के तौर पर उससे यादगार लम्हा कोई नहीं हो सकता, जब आप पुरस्कार लेने के लिए पोडियम में खड़े हैं। आपके सामने तिरंगा लहरा रहा है। ऐसा लम्हा जीवन का सबसे अनमोल पल होता है। मैं ऊपर वाले का शुक्रगुजार हूं कि मुझे सिविल सर्विस के जरिए भी देश और लोगों की सेवा का मौका मिला। 

कदम बढ़ाना जरूरी है
इस मौके पर उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा, सफलता और असफलता जीवन के दो पहलू हैं। सबसे जरूरी शुरुआत है। इसलिए बेझिझक कदम बढ़ाएं। अगर आप कुछ हासिल करना चाहते हैं, तो प्रकृति इसे आपके लिए सुलभ बनाती है। प्रकृति और भगवान सबको सब कुछ नहीं देते। पर इसकी शिकायत के बजाय जो मिला है, उसका उपयोग कर कुछ हासिल करना ज्यादा उत्तम है। हार के डर से कदम नहीं बढ़ाना उचित नहीं है। इसलिए अगर कुछ हासिल करना चाहते हैं, तो शुरुआत जरूर करें।

कर्नाटक के मूल निवासी हैं सुहास 
सुहास एलनाई का पूरा नाम सुहास लालिनकेरे यतिराज (Suhas Lalinakere Yathiraj) है। वह मूल रूप से कर्नाटक के शिमोगा के रहने वाले हैं। उनका जन्म 2 जुलाई 1983 को हुआ था। बचपन से ही सुहास एक पैर से विकलांग हैं। उनका दाहिना पैर पूरी तरह फिट नहीं है। उन्होंने सुरतकल से अपनी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद यहीं स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कम्प्यूटर साइंस में इंजिनियरिंग की डिग्री हासिल की।
 
मेडिकल और इंजीनियरिंग दोनों परीक्षा में शामिल हुए
इंटरमीडियट के बाद सुहास ने मेडिकल और इंजिनियरिंग दोनों की परीक्षा दी। उन्होंने दोनों परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की। बैंगलोर मेडिकल कॉलेज में उन्हें सीट मिली। मगर उनका रुझान इंजीनियरिंग में ज्यादा था। सुहास असमंजस में भी थे। दरअसल उनका परिवार सुहास को डॉक्टर बनाना चाहता था। परिवार की इच्छा के आगे सुहास ने अपनी इच्छाओं को दबाए रखीं। एक दिन उनके सिविल इंजीनियर पिता ने सुहास को परेशान बैठे देखा और उनसे बात की। तब उन्होंने इंजीनियर बनने की इच्छा जताई। फिर क्या था। उनके पिता ने भी हामी भर दी। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। डिग्री पूरी होने के बाद उन्होंने बेंगलुरु की एक आईटी फर्म में काम शुरू कर दिया।

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